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कपूरथला : कोलकाता में संत सीचेवाल को ‘विवेकानंद सेवा सम्मान’ से नवाजा, बड़ा बाजार कुमार सभा पुस्तकालय ने करवाया सम्मान समारोह

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पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल को सम्मानित करते गण्यमान्य। - फोटो : KAPURTHALA
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सुल्तानपुर लोधी(कपूरथला)। श्री बड़ा बाजार कुमार सभा पुस्कालय की ओर से 36वां विवेकानंद सेवा सम्मान-2022 इस बार पंजाब के पर्यावरणविद् पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल को दिया गया। इसमें सम्मान पत्र और एक लाख रुपये की राशि भी शामिल है। यह सम्मान रविंदरनाथ टैगोर के जन्म स्थान ठाकुरबाड़ी में हुए समागम के दौरान केंद्रीय राज्य शिक्षा मंत्री सुभाष सरकार ने दिया। इस समागम दौरान वक्ताओं ने पंजाब में संत बलबीर सिंह सीचेवाल की तरफ से लोक भलाई और समाज सेवा के किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। वक्ताओं ने कहा कि संत सीचेवाल ने गुरु नानक देव जी की चरणस्पर्श 165 किलोमीटर लंबी पवित्र काली बेईं को फिर से निर्मल धारा में बदलकर बहुत ही प्रेरणादायक काम किया है।
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संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने समारोह में बताया कि जब उन्होंने संगत को साथ लेकर जल के इस प्राकृतिक स्रोत काली बेईं को साफ करने का कार्य शुरू किया था तो तब उनके साथ न तो प्रशासन था और न ही बड़ा बजट। उन्होंने बताया कि गंगा को साफ करना है तो इसमें पड़ रही हर तरह की गंदगी को रोकना पड़ेगा। संत सीचेवाल ने कहा कि जन सहभागिता के बिना कोई भी काम सिरे नहीं चढ़ाया जा सकता। हमारी त्रासदी यह है कि हम पीने वाले पानी को खेतों में बहा रहे हैं और गंदा पानी दरियाओं में डालकर उनको भी दूषित कर रहे हैं। इसका सुधार समय की जरूरत है, हमें आलोचना करने के बजाय विकल्प की तरफ ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कुमार सभा पुस्तकालय का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह सम्मान उनका नहीं, बल्कि समस्त समर्पित संगत और सेवकों का है। केंद्रीय राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने कहा कि संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पवित्र नदी को साफ करके जो मिसाल स्थापित की है, उससे सेध लेकर पानी के कुदरती स्त्रोतों को बचाया जा सकता है। संत सीचेवाल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सड़कें बनाने का जो काम किया है वह प्रशंसनीय ही नहीं अपितु मिसाली भी है। इस मौके महावीर बजाज, बचन सिंह सरल, बलबीर सिंह बलिंग, गोपाल दत्त और अन्य सिख भाईचारे के प्रतिनिधियों ने भी शमूलियत की।
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बॉक्स आइटम: संत सीचेवाल ने कहा कि दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में पांच सूबों के सरपंचों को बुलाया गया, जिसमें पश्चिमी बंगाल के वे गांव भी शामिल थे, जो गंगा किनारे बसे हुए हैं। केंद्र सरकार ने गंगा की सफाई शुरू करने के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा हुआ था, परंतु यदि गंगा किनारे के गांवों को ही सरकार सही तरीके से दो हजार करोड़ रुपये ही लगा देती तो उनका गंदा पानी गंगा में नहीं पड़ना था। उन्होंने कहा कि गंदे पानी को ट्रीट करके खेती को लगाया जाए तो इससे लाभ मिलेंगे। पंजाब में उन्होंने ने ऐसा ‘सीचेवाल मॉडल’ के जरिये साकार करके भी दिखाया है।
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