कैप्टन अमरिंदर सिंह सदा ही विश्वासघात करते रहे हैं। उन्होंने देश से के साथ पंजाब और कांग्रेस पार्टी से विश्वासघात किया है। मैंने जो साढ़े तीन साल पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह के बारे में बात कही थी कि वह भाजपा से मिले हैं, एकदम सही साबित हुई। यह बात पंजाब के शिक्षा मंत्री ने परगट सिंह ने कही।
परगट सिंह एक समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे, जहां वह कुछ देर के लिए पत्रकारों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उम्र के इस मुकाम पर आकर भाजपा के साथ हाथ मिला रहे हैं, इससे उनकी विरासत कमजोर ही होगी। मेरी कैप्टन अमरिंदर सिंह को सलाह है कि उन्होंने जितनी भी इज्जत कमाई है या पंजाब ने आपको जितनी इज्जत दी है, उसे संभाल कर रखें।
राजनीति से रिटायर्ड होकर अपनी जिदंगी आराम से बिताएं और रब का नाम लें। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के भाजपा से मिल जाने से किसी को फायदा नुकसान होगा, यह तो पता नहीं, इससे कैप्टन का नुकसान तय है। शिक्षा मंत्री से जब कैप्टन की नई पारी की शुरुआत करने और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस तरह सोचना बदकिस्मती है। पंजाब के साढ़े तीन साल कैप्टन को किस ने रोका था कि वह पंजाब की सेवा न करें? कांग्रेस से बाहर आकर अब उन्हें पंजाब की चिंता सता रही है। उन्होंने कहा कि जो जैसा सोचता है, उसे सोचने दीजिए, जनता सब जानती है।
कार्यक्रम में पहुंचे शिक्षक को धक्के मारकर निकाला
देशभक्त यादगार हॉल में केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा की तरफ से रविवार को मातृ भाषाओं का महत्व विषय पर पंजाबी भाषा चेतना कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें में पंजाब के शिक्षा मंत्री परगट सिंह भी मौजूद रहे। शिक्षामंत्री के इस कॉन्फ्रेंस में मौजूद होने का पता जैसे ही एक अध्यापक को चला, वह भी पहुंच गया। उक्त अध्यापक बलराज ने वहां पर मौजूद शिक्षामंत्री से मिलने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने धक्के मारकर वहां से बाहर निकाल दिया।
हालांकि उक्त अध्यापक बार-बार यह ही कह रहा था कि वह विरोध जताने नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्री व कॉन्फ्रेंस में मौजूद बुद्धिजीवीयों तक अपनी फरियाद पहुंचाने आया है। अध्यापक बलराज सिंह ने कहा कि उन्होंने एमए, एमफिल की है। उनके मास्टर कैडर में 117 नंबर होने के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही। इसका कारण यह है कि सरकार ने इसमें एक भी पद नहीं निकाला है। पंजाबी के प्रसार की सब बातें झूठी हैं।