कभी एक साथ पंजाब के जालंधर जिले की राजनीति के शिखर पर चमकने वाली पार्टियों का गठबंधन टूटेगा तो इतना बुरा हश्र होगा किसी ने नहीं सोचा था। कृषि कानूनों के मुद्दे पर गठबंधन तोड़कर अपने दम पर चुनाव लड़ रही भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल का सफाया हो गया। 2017 में जब साथ मिलकर लड़े थे भाजपा को भले ही कोई सीट न मिली हो पर अकाली दल के खाते में 3 सीटें तो थीं पर अब तो सूपड़ा साफ हो गया है।
जालंधर अकाली-भाजपा मुक्त हो गया, आप की बदलाव की आंधी में कांग्रेस को जिले में एक ही सीट का नुकसान हुआ। 14 फरवरी की मोदी की पीएपी ग्राउंड जालंधर में हुई रैली सभी को याद है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मनोरंजन कालिया को वह डिप्टी सीएम बनाना चाहते थे पर प्रकाश सिंह बादल ने अपने बेटे सुखबीर बादल को बना दिया था। उनका वर्ष 2022 के इलेक्शन में कद ही नहीं घटा, 2017 में नंबर दो पर रहने वाले मनोरंजन कालिया 2022 में नंबर तीन पर खिसक गए।
सेंट्रल सीट आम आदमी पार्टी के खाते में गई, जिसमें आम आदमी पार्टी के रमन अरोड़ा को 33011 वोट, पूर्व विधायक राजिंदर बेरी को 32764 वोट, पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया को 27993 वोट और शिरोमणि अकाली दल - बसपा गठबंधन उम्मीदवार चंदन ग्रेवाल को मात्र 10793 वोट पड़े। भाजपा जिले की पांच अन्य सीटों वेस्ट, नॉर्थ, कैंट, शाहकोट और करतारपुर में सहयोगी पार्टी पीएलसी दो आदमपुर और नकोदर और अकाली दल संयुक्त फिल्लौर की सीट पर चुनाव लड़ रहे थे।
सभी में हार का सामना करना पड़ा। इस बार चुनावों में करारी हार ही नहीं मिली, वोट प्रतिशत में कमी आई, अब इसे कृषि कानूनों की मार कहें या आप की लहर पर बड़े-बड़े दिग्गजों को अपने सीटें गंवानी पड़ी। अकाली दल की फिल्लौर, नकोदर व आदमपुर सीट, लगातार दो बार अकाली दल का विधायक था अब दो कांग्रेस और एक आप के खाते में गई है।
जिले में 94 उम्मीदवार, 67 की जमानत जब्त
जालंधर की नौ विधानसभाओं में 94 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई थी, जिसमें 70 फीसदी उम्मीदवार छवि जनता को रास नहीं आई और 67 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। सबसे खस्ता हालत तो भाजपा और अकाली दल के उम्मीदवारों की हुई। इसमें गठबंधन टूटने के बाद अकेले दम पर चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों को जमानत बचाना मुश्किल हो गया।
वोट प्रतिशत की बात करें तो नॉर्थ से कांग्रेसी उम्मीदवार बावा हैनरी को सबसे ज्यादा 36.94 फीसदी मत मिले तो वहीं समाजिक मुक्ति पार्टी फिल्लौर की उम्मीदवार हरविंदर कौर को सबसे कम 0.5 फीसदी वोट मिले। बात करें उम्मीदवारों की तो आदमपुर में 10 में 7, करतारपुर में 8 में से 5, शाहकोट में 11 में से 8, नकोदर में 11 में से 8, फिल्लौर में 14 में से 11, कैंट में 10 में से 7, नॉर्थ में 10 में से 7, वेस्ट में 12 में से 9 व सेंट्रल में 8 में से 5 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है।
भाजपा के करतारपुर से उम्मीदवार सुरिंदर महे, कैंट उम्मीदवार सर्बजीत सिंह मक्कड़ व शाहकोट में नरिंदर पाल सिंह चंडी की जमानत के साथ साख जब्त हो गई। अकाली दल को भी मुंह की खानी पड़ी और सेंट्रल से उम्मीदवार चंदन ग्रेवाल की जमानत जब्त हो गई। भाजपा की सहयोगी पार्टियों पंजाब लोक कांग्रेस के दो और अकाली दल संयुक्त के एक उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई है। बसपा को दोनों शहरी सीटों वेस्ट व नॉर्थ में बुरी तरह से हार मिली।