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जुआरियों का अड्डा बना करोड़ों का पार्क : रोज सजती हैं महफिलें... लंच में पत्तों का लुत्फ उठाते हैं निगम कर्मचारी

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जालंधर। नगर निगम का कंपनी बाग पार्क जिसे कभी खूबसूरती के लिए सराहा जाता था अब उसी पार्क के अस्तित्व पर ग्रहण लग गया है। अब इसे जुआरियों के नये अड्डे के नाम से जाना जाता है। जहां लोग समय बिताने के लिये नहीं बल्कि पैसों के दांव लगाते हैं। सुबह धूप खिलते ही कोई दिन ऐसा नहीं गुजरता जब पार्क में महफिल न सजती हो।
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निगम कर्मचारी भी लंच ब्रेक में पार्क में भ्रमण के लिए आते हैं। वह पत्तों का लुत्फ उठाने से नहीं चूकते, यहां तक कि एक-एक हाथ अजमा भी लेते हैं। साल का 34.56 लाख का रखरखाव का प्रोजेक्ट, एवरेज लगाएं तो 3 लाख रुपये के करीब हर महीने मिलते हैं। पार्क में बच्चों के खेलने के लिये लगे झूले टूट चुके हैं जिन्हें न बदला गया और न ही नए लगाये गये। नगर निगम ने पिछले वित्त वर्ष में पार्क के रखरखाव का जिम्मा होशियारपुर की कंपनी को दिया था पर कुछ शिकायतों के बाद अब यह टेंडर जालंधर की एक प्राइवेट कंपनी को मिला है। हार्टिकल्चर एसई जगन्नाथ से पार्क पर खर्च हो रहे रुपयों को लेकर बात की गई तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि पहले निगम कमिश्नर को अर्जी दो। ऑर्डर हुए तो जबाव देंगे। पार्क के रखरखाव का जिम्मा पहले होशियारपुर और जालंधर के प्राइवेट कांट्रेक्ट कंपनी को दिया गया है। उनके जवाब का सीधा मतलब है कि जनता अपने टैक्स का हिसाब नहीं मांग सकती, निगम टैक्स के लाखों रुपये ऐसे ही उड़ाये जा रहा है।
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