जालंधर। पंजाब की चरणजीत सिंह चन्नी सरकार में मंत्री पद मिलते ही विधायक परगट सिंह के भी सुर बदल गए हैं। विधायक से खेल व शिक्षा मंत्री बने परगट सिंह ने अब नवजोत सिंह सिद्धू पर ही निशाना साधना शुरू कर दिया है।
जालंधर में शुक्रवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए खेल व शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने कहा कि किसे रखना है, किसे नहीं रखना है, यह उनसे ऊपर का मामला है। जबकि राणा गुरजीत सिंह के मंत्रिमंडल में शामिल होने पर सिद्धू की नाराजगी पर खुद परगट सिंह व सुखपाल सिंह खैहरा सहित कई नेताओं ने भी सवाल उठाए थे।
कैबिनेट मंत्री बने परगट सिंह को नवजोत सिंह सिद्धू के सबसे करीबी लोगों में माना जाता है, लेकिन उनका यह बयान राजनीति से प्रेरित लग रहा है। इससे पहले भी जब नवजोत सिंह सिद्धू के पद त्यागने के बाद मंत्री बनने वाली रजिया सुल्ताना ने अपना त्यागपत्र दे दिया था तो मंत्री बने परगट सिंह ने अपने त्यागपत्र की खबरों को अफवाह बताते हुए त्यागपत्र देने से इंकार कर दिया था।
हालांकि सिद्धू के पंजाब कांग्रेस का प्रधान बनने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने की मुहिम में परगट सिंह ने सभी को एकजुट किया था। अब नई सरकार में परगट सिंह को खेल व शिक्षा मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद वह किसी भी हालत में सिद्धू के हक में बोलकर हाईकमान को नाराज नहीं करना चाहते।
हालांकि परगट सिंह ने अपनी सरकार को इतना कहते हुए कटघरे में जरूर खड़ा किया कि नई सरकार है और कुछ गलतियां हो जाती हैं, जिसे ठीक किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू की नाराजगी का मामला सुलझ चुका है और वह कहीं नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि काम करने के लिए सिर्फ 90 दिन का समय है, लेकिन इतने समय में भी खेल व शिक्षा को लेकर एक नया माहौल बनाया जा सकता है।