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Stubble Burning: धान की 30 लाख हेक्टेयर में खेती, पराली जलाने को रोकने में सरकार हर कदम पर फेल

Tue, 08 Nov 2022 10:48 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

केंद्र ने पंजाब को 1,450 करोड़, हरियाणा को 900 करोड़, उत्तर प्रदेश को 713 करोड़ और दिल्ली को छह करोड़ रुपये जारी किए थे। पंजाब ने लगभग 500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल नहीं किया है। यह दावा केंद्रीय  कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। 
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सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
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पंजाब पराली ( धान की फसल के अवशेष) जलाए जाने की घटनाओं को लेकर फिर सुर्खियों में है। पंजाब में हर साल लगभग 30 लाख हेक्टेयर जमीन पर दो करोड़ टन धान की पराली पैदा होती है जिसमें से 90 प्रतिशत आमतौर पर आग की लपटों के हवाले कर दी जाती है। हर साल पराली जलाने के दिनों में दिल्ली से लेकर पंजाब तक हो हल्ला मचता रहा लेकिन पराली की समस्या जस की तस बनी हुई है। हर सरकार अपना फंडा व डफली बजाती है लेकिन जमीनी स्तर पर हर साल पराली जलती है। बॉयो गैस प्लांट से लेकर खाद, बोर्ड बनाने से लेकर चारा बनाने की फैक्टरियां तैयार करने की योजना बनती गई लेकिन बाद में लुप्त भी होती चली गई।

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500 करोड़ खर्च ही नहीं किया पंजाब सरकार ने
केंद्र ने पंजाब को 1,450 करोड़, हरियाणा को 900 करोड़, उत्तर प्रदेश को 713 करोड़ और दिल्ली को छह करोड़ रुपये जारी किए थे। पंजाब ने लगभग 500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल नहीं किया है। यह दावा केंद्रीय  कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। 

कैप्टन सरकार ने 800 नोडल अधिकारी तैनात करने का एलान किया था
कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में 2020 में पंजाब सरकार ने गांवों में 8,000 नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने का एलान किया था, ताकि पराली जलने की घटनाओं पर नजर रख सकें, लेकिन नोडल अधिकारी सिर्फ दस्तावेजों में ही दिखाई दिए, वह गायब हो गए।

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80 फीसदी छोटे किसान, मशीनें नहीं पहुंच रही किसानों तक
सरकार की तरफ से घोषणा की गई कि इस साल 30 हजार अधिकार पराली प्रबंधन मशीनें दी जा रही हैं जिससे फसल अवशेष का मौके पर ही निस्तारण किया जा सके। पंजाब में 80 फीसदी छोटे किसान हैं जो 8 से 10 लाख रुपये की लागत वाली ये मशीनें नहीं खरीद सकते।

नकद प्रोत्साहन का भी नहीं मिल रहा है लाभ
वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए प्रोत्साहन देने के निर्देश दिए थे। उसके बाद पंजाब सरकार ने पराली न जलाने वाले छोटे और सीमांत किसानों को प्रति एकड़ 2,500 रुपये देने का फैसला किया था। इसके बाद उस साल 31,000 किसानों को 20 करोड़ रुपये बांटे गए, लेकिन उसके बाद बजट की कमी के चलते सरकार ने किसानों को प्रोत्साहन राशि नहीं दी। इससे सार्थक परिणाम नहीं आए।

केस दर्ज का डर लेकिन सरकार वापस लेती है केस
राज्य सरकार के अधिकारियों का दावा है कि दोषी किसानों के खिलाफ सैकड़ों केस दर्ज किए गए हैं और उन पर जुर्माना भी किया जा रहा है। लेकिन किसान संगठन खुलकर मैदान में हैं, जिससे सरकार बैकफुट पर चली जाती है। पंजाब में पराली केस दर्ज 2021 में 15 सितंबर से छह नवंबर तक कुल केसों की संख्या 32734 रही थी। इस साल 3 नवंबर को 2666 केस, 2 नवंबर को 3634, 1 नवंबर को 1842 जगह पर पराली जलाने के केस रिकॉर्ड किए गए हैं। संगरूर जिला सबसे टॉप पर रहा लेकिन एक भी चालान नहीं किया गया।

ईंट के भट्ठों पर पराली के इस्तेमाल की योजना, पर हो गई फेल
पंजाब सरकार ने पराली को भूसे बनाकर औद्योगिक बॉयलरों और ईंट भट्टों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की योजना भी बनाई, लेकिन यह कारगर साबित नहीं सकी। वर्तमान में राज्य में धान की भूसी के केवल दो ही ईंट भट्टे हैं वह प्रतिदिन 124 टन माल का उत्पादन करते हैं। इसमें केवल 44,000 मीट्रिक टन भूसे का ही उपयोग होता है, जो उत्पादन की तुलना में बहुत कम है।

बॉयोमास प्लांट, वित्तमंत्री ने किया था उद्घाटन, सिरे नहीं चढ़ा प्लांट
पराली निस्तारण को लेकर सरकार की शुरू की गई एक भी योजना आज तक सिरे नहीं चढ़ सकी। इसमें एक बायोमास प्लांट भी है। ऐसे पूरे पंजाब में 200 प्लांट लगने थे। इस प्लांट में पराली से सल्फर मुक्त कोयला व कैटल फीड बनाई जानी थी। पूर्व वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने 24 जून, 2018 बठिंडा के गांव मेहमा सरजा में प्लांट का उद्घाटन कर चार साल पहले अलख जगाई थी कि सूबे से पराली की समस्या से निजात मिलेगी। चार साल बीत जाने के बाद भी 200 प्लांट लगने तो दूर, पहला ही शुरू नहीं हो पाया।

नींव पत्थर रखने के बाद पंजाब सरकार की दिलचस्पी न होने के कारण यह प्रोजेक्ट फेल हो गया। बायोमास प्लांट अपने आसपास के 10 किलोमीटर का एरिया कवर करता। जहां पर एरिया की सारी पराली इकट्ठी की जाती और हर रोज करीब 300 टन पराली की खपत की जाती। इतनी ही मात्रा में अन्य मैटेरियल भी प्रोसेस किया जाता। इससे 200 टन कोयला व 250 टन कैटल फीड बनती, लेकिन मामला चारदीवारी तक सिमट गया।

यूके की कंपनी के साथ भी किया था समझौता, पर फेल
पराली की संभाल के लिए पंजाब सरकार ने इंडियन आयल कारपोरेशन के साथ भी गैस बनाने को लेकर समझौता किया था। मगर प्लांट के शुरू न हो पाने के कारण यह बीच में ही रह गया। जबकि इंग्लैंड की अरीका कंपनी के साथ भी बायोएथेनाल प्लांट बनाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन यह भी सिरे नहीं चढ़ सकी।

पंजाब सरकार ने बायोमास बिजली संयंत्र स्थापित किए, 16 साल बाद ठप बिजली पैदा करने के लिए धान की पराली का उपयोग करने के उद्देश्य से पंजाब सरकार ने 2005 में बायोमास बिजली संयंत्र स्थापित करना शुरू किया था, लेकिन 16 वर्षों में केवल 11 संयंत्र ही स्थापित हो पाए हैं। ये संयंत्र केवल 100 मेगावाट बिजली का उत्पादन करते हैं और इनमें सालाना 10 लाख टन धान की पराली का उपयोग होता है। ऐसे में पंजाब सरकार पराली को जलाने से रोकने के लिए किया गया यह प्रयास सफल नहीं हुआ।

जैव रासायनिक खाद में नहीं है किसानों की रुचि
पंजाब सरकार ने किसानों को पराली को विशेष उपकरणों की मदद से जमीन में गाड़ने और उससे जैस रासायनिक खाद बनाने के लिए भी प्रेरित किया है, लेकिन इसकी प्रक्रिया लंबी और अधिक मेहनत वाली होने के कारण किसानों की इसमें रुचि नहीं है।
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बाजार से मशीन 35 हजार की, सरकार दे रही 55 हजार की
पंजाब सरकार का अभी तक का अभियान फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों को रियायती दरों पर किसानों को बेचने पर रहा है। 2018 में योजना शुरू होने के बाद से पंजाब ने 1100 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसमें व्यक्तिगत किसान को उपकरण की कुल लागत पर 50 प्रतिशत और ग्राम सहकारी समिति या किसानों समूह को 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। इसके बाद भी किसान इसे महंगी बताकर खरीदने से बच रहे हैं। सरकार द्वारा बेची जाने वाली सीआरएम मशीनें महंगी हैं। बाजार में एक मशीन बिना सब्सिडी के ही 35,000 रुपये में उपलब्ध है, लेकिन सीआरएम मशीनें 50 प्रतिशत सब्सिडी के बाद भी 55,000 रुपये तक पड़ती है।

अब नजर बायो एनर्जी प्लांट की तरफ
18 अक्तूबर को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के साथ 20 एकड़ क्षेत्रफल में 230 करोड़ रुपये की लागत से लगे बायो एनर्जी प्लांट का उद्घाटन किया। 80,000 क्यूबिक मीटर प्रतिदिन की क्षमता वाला प्रोजेक्ट बायोगैस पैदा करेगा जो पराली जलाने की समस्या को हल करने का बढ़िया तरीका है। भगवंत मान का कहना है कि इस यूनिट में सालाना 1.30 लाख टन पराली की खपत होगी जिससे पराली की गंभीर समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी। यदि यह प्रोजेक्ट सफल हो जाता है तो वरबीयो ग्रुप की तरफ से राज्य में ऐसे 10 और प्लांट स्थापित किए जाएंगे।
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