मृतक लखबीर और गम में डूबी पत्नी जसप्रीत।
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अनुसूचित जाति का मजहबी सिख लखबीर सिंह खेत मजदूर था। परिवार को दो वक्त का खाना भी ढंग से नसीब नहीं होता था। गांव वाले हैरान हैं कि लखबीर दिल्ली कैसे पहुंच गया? वह नशा जरूर करता था लेकिन रब्ब से डरने वाला बंदा था। तरनतारन के गांव चीमा खुर्द की रहने वालीं सुरिंदर कौर व कंवलजीत कौर ने बताया कि वह आज तक कभी अमृतसर नहीं गया फिर यह मानना मुश्किल है कि वह दिल्ली कैसे पहुंच गया।
वह नशा जरूर करता था लेकिन किसी से बदतमीजी नहीं करता था। लखबीर की पत्नी जसप्रीत कौर और 12, 11 एवं 8 साल की तीन बेटियां पवित्र शहर अमृतसर से करीब 50 किमी दूर गांव चीमा कलां में एक छोटे से कच्चे मकान में रहती हैं। उनके बेटे की दो साल पहले मौत हो गई थी।
हालात यह है कि लखबीर के रहते हुए भी परिवार मुश्किल से दिन में दो वक्त के भोजन का प्रबंध कर पाता था और अपनी आजीविका के लिए गांव के खेतों में या तरनतारन जिले की अनाज मंडी में काम करता था। अब परिवार के वाहेगुरुजी ही रखवाले हैं।
लखबीर की बहन जसप्रीत कौर ने कहा कि उसका भाई ईश्वर से डरने वाला व्यक्ति था, जो कभी पवित्र पुस्तक को अपवित्र करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था। जब भी वह किसी गुरुद्वारे में जाता था तो अपने परिवार और समाज की भलाई के लिए प्रार्थना करता था।
आखिरकार कौन है संधू साहब
लखबीर सिंह के परिवारिक सदस्यों के अनुसार उसको एक संधू साहब का फोन कुछ दिनों से आ रहा था। वह जब भी फोन सुनता था तो कमरे से सभी को निकाल देता था। आखिरकार संधू कौन है? लखबीर सिंह से उसका क्या वास्ता था? लखबीर सिंह निहंग नहीं था। टी शर्ट व खुले कपड़े पहनता था फिर वह निहंग के बाने (वेशभूषा) में दिल्ली कैसे पहुंच गया? यह सवाल इस बात की आशंका पैदा कर रहा है कि इस घटना के पीछे कोई सुनियोजित योजना थी। गांव के लोगों का कहना है कि दो बार गांव से कुंडली बॉर्डर के लिए जत्था गया लेकिन लखबीर साथ नहीं गया। ऐसे में इस बार दिल्ली बॉर्डर पर क्यों चला गया? कुछ दिनों से लखबीर सिंह यह भी बोलने लगा था कि अब उसकी पहुंच ऊपर तक है।