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एनसीएलपी प्रोजेक्ट बंद होने से फिर कूड़ा बीनने को मजबूर हुए बच्चे

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जालंधर। नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट (एनसीएलपी) बंद होने के कारण इन स्कूलों में पड़ रहे बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई है। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद मजदूरों व गली-गली कूड़ा बीनने वालों के बच्चे भी पढ़ना करना शुरू हो गए थे। इस प्रोजेक्ट के बंद होेने के बाद यह बच्चे फिर से कूड़ा बीनने व मजदूरी करने को मजबूर हो गए हैं।
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इस प्रोेजेक्ट के बंद होने व पिछले 27 महीनों की सैलरी न मिलने के कारण शिक्षक पिछले कईं दिनों से सड़कों पर बैठ प्रदर्शन कर रहे हैं। स्कूलों की शिक्षकों की ओर से दिए जा रहे धरने में बुधवार को उनके बच्चे बैठ गए। इन बच्चों ने शिक्षकों की तरफ से दिए गए काम को सड़क पर बैठकर ही किया। धरने के दौरान प्रधान मिलक शर्मा ने कहा कि इन बच्चों के भविष्य का सवाल है, जिसके चलते इस प्रोजेक्ट को बचाना जरूरी है। लेबर क्लास के स्कूल बंद होने की वजह से यह बच्चे फिर से सड़कों पर आ गए हैं और दोबारा अपने पुराने कामों में लग गए हैं।
उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में कुछ ऐसे बच्चे पढ़ते थे, जिनके मां-बाप गली-गली जाकर कागज कचरा बीनते थे या मजदूरी करते थे। अब बच्चों की पढ़ाई न होने की वजह से उनके बच्चे उसी काम में फिर से लग पड़े हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को एक साल पहले बंद कर दिया गया था पर किसी ने उन्हें सूचना देना ठीक नहीं समझा। प्रोजेक्ट बंद होने के बाद लेबर विभाग और जिला प्रशासन की तरफ से उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए दबाव बनाया जाता रहा है। अब जब वह 27 माह का बकाया वेतन मांग रहे हैं तो उन्हें सिर्फ छह महीने का वेतन ही देने की बात कही जा रही है।
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