विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े पंजाब में राजनीति गरमाई हुई है। सूबे में परिदृश्य भी इस बार बदला हुआ है। खासकर आम आदमी पार्टी नए कलेवर में दिखाई दे रही है। पिछली गलतियों से सबक लेकर टीम केजरीवाल फूंक फूंककर कदम रख रही है। पार्टी ने उन मुद्दों से दूरी बना रखी है, जिनके कारण पिछली बार उसे हार का मुंह देखना पड़ा था।
2017 के चुनावों से पहले पंजाब में काफी एनआरआईज ने डेरा डाल लिया था। पंजाब आप का एनआरआई विंग काफी मजबूत माना जा रहा था। एनआरआई ने विदेशों में बैठकर पंजाब की राजनीति में आप को चमकाया, वहीं भारी संख्या में एनआरआईज विदेशों से भारत भी पहुंचे थे और प्रचार में हिस्सा लिया था। पंजाब में आम आदमी पार्टी के एनआरआई सेल के यूथ उपसंयोजक जोबन रंधावा बनाए गए, जो खुद एनआरआई थे। पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अब 30 हजार एनआरआई समर्थकों ने प्रचार के लिए खुद को पार्टी के साथ रजिस्टर किया था और तब 2000 आप समर्थक एनआरआई समर्थक पंजाब पहुंचे थे।
कनाडा की मशहूर पत्रकार नवजोत कौर ढिल्लों का कहना है कि इस बार माहौल बदला हुआ है। कनाडा में आप का प्रचार या समर्थन नहीं दिख रहा है। पिछली बार आप के लिए एनआरआईज ने पूरी ताकत झोंकी थी और पंजाब में जब आप की सरकार नहीं बनी तो एनआरआईज को झटका भी लगा था। इस बार एनआरआईज पीछे हैं। आप के लिए फंड एकत्रित करने की मुहिम भी कनाडा में नहीं चल रही है।
यूके के सिख चैनल की एंकर परविंदर कौर सरोया का कहना है कि पंजाब का चुनाव पिछली बार से बिलकुल उलट हो रहा है। 2017 में एनआरआईज ने आप का डटकर समर्थन किया था और यूके से लेकर यूरोप तक के तमाम शहरों में आप के लिए न केवल रैलियां की थीं बल्कि प्रचार के लिए पैसा भी एकत्रित किया था। आप की तरफ से इस बार एनआरआईज को बिलकुल तवज्जो नहीं दी जा रही है और न ही यूके में कोई प्रचार या फंड एकत्रित करने के लिए कार्यक्रम किए गए हैं।
आप के फंड रेजिंग एंड एनआरआई विंग होशियारपुर (अमेरिका) के पूर्व को-आर्डिनेटर वरिंदर सिंह परिहार ने आम आदमी पार्टी के नेताओं पर संगीन आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी कि पार्टी 200 से लेकर 500 करोड़ रुपये तक पंजाब से इकट्ठे कर दिल्ली ले गई है। इसे अमेरिका में रह रहे एनआरआईज से इकट्ठा किया गया। आरोप था कि पार्टी के सांसद भगवंत मान वैंकुवर गए थे। 2016 की गर्मियों में सुखपाल सिंह खैहरा अमेरिका गए थे। उन्होंने सिएटल, कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी और अन्य स्थानों पर एनआरआईज से मीटिंग की। उनके साथ अरविंद केजरीवाल ने अपने दो आदमी भी भेजे थे। एनआरआईज ने उन्हें लाखों डॉलर दान के रूप में दिए।
खैरा ने उसमें से अपना हिस्सा मांगा, लेकिन सारा पैसा केजरीवाल ले गए। इसे लेकर खैरा और केजरीवाल में झगड़ा भी हुआ, जिस पर केजरीवाल ने खैरा का पार्टी में दर्जा कम कर दिया। उसके बाद से पार्टी में खैरा की गतिविधियां कम हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के पंजाब कन्वीनर गुरप्रीत सिंह घुग्गी ने भी अपने विदेशी दौरों के दौरान लाखों डॉलर इकट्ठे किए। बलबीर कौर के बेटों ने उन्हें खूब पैसा दिया। यही कारण है कि उन्हें दसूहा से टिकट दिया गया, जबकि उनकी वहां के आप वॉलंटियर्स में कोई पहचान नहीं है। परिहार ने आरोप लगाया कि हिम्मत सिंह शेरगिल व संजय सिंह ने यह फंड इकट्ठा करने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन अब यह पैसा गायब है।
पंजाब में 2017 में चुनावों में मुद्दा ही केजरीवाल की गर्मख्यालियों से नजदीकियां बन गया। पार्टी का पूरा समर्थन एनआरआईज कर रहे थे। एनआरआई गुरविंदर सिंह खालिस्तान कमांडो फोर्स का सक्रिय आतंकी था, जो इस समय वह इंग्लैंड में है। एनआरआईज ने केजरीवाल के लिए गुरविंदर सिंह की कोठी का चयन किया था, जिस कारण केजरीवाल की जबरदस्त आलोचना हुई थी।