कांफ्रेंस न होने से रहेगा पूरी तरह चालीस मुक्तों को समर्पित
मेला माघी इस बार भी निरोल धार्मिक रहेगा। हालांकि पिछले कुछ वर्षों से धार्मिक मेलों में सियासी कांफ्रेंस का चलन बंद ही हो गया है, मगर इस बार तो विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता भी लागू है, ऐसे में किसी दल की सियासी कांफ्रेंस न होने से सियासत का तड़का नहीं लगेगा। मेला माघी पूरी तरह शहीदों को समर्पित रहेगा। बता दें कि एक समय ऐसा भी होता था जब मेला माघी पर सभी दलों की सियासी कांफ्रेंस हुआ करती थी और नई दिल्ली से केंद्रीय नेता तक कांफ्रेंस में पहुंचकर एक-दूसरे पर सियासी छींटाकशी करते थे। मगर अब कुछ वर्षों से मेला माघी पूरी तरह से चालीस मुक्तों को समर्पित रहता है।
निहंग सिंहों ने डाले डेरे, कोहरे में भी पहुंची संगत
मेले को लेकर गुरुद्वारा टिब्बी साहिब, गुरु नानक कॉलेज के सामने स्थित छावनी बहादुर बाबा बिधि चंद साहिब में निहंग-सिंहों ने डेरे जमाने शुरू कर दिए हैं। गुरुवार को घने कोहरे में भी संगतों ने मुक्तसर पहुंचना शुरू कर दिया था। वहीं टिब्बी साहिब गुरुद्वारा के पास भी विभिन्न साजो-सामान की स्टालें लगने लगी हैं। मेले दौरान निहंग सिंह घुड़दौड़ में घुड़सवारी के हैरतअंगेज करतब दिखाएंगे।
वीर बाल दिवस तीनों शब्द ही गुरमति के अनुकूल नहीं: एडवोकेट धामी
एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी शुक्रवार को गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब में नतमस्तक हुए। इस मौके पर पत्रकारों के साथ बातचीत में धामी ने कहा कि केंद्र सरकार ने छोटे साहिबजादों की शहादत के दिन को समर्पित 'वीर बाल दिवस' मनाने की बात कही है, मगर 'वीर बाल दिवस' यह तीनों ही शब्द गुरमति के अनुकूल नहीं हैं। ये शब्द सिख इतिहास में इस्तेमाल होने वाले शब्दों से मेल नहीं खाते।
उन्होंने बताया कि इस बाबत केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है जिसमें उन्होंने कहा है कि इस संबंध में एक कमेटी बनाई जाए। श्री अकाल तख्त साहिब के नेतृत्व में बनने वाली वह कमेटी जिस भी नाम का सुझाव देगी उस नाम पर दिवस मनाया जाए। धामी ने गत दिवस गुजरात के एक स्कूल में छोटे साहिबजादों की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह घटना निंदनीय है। इस संबंध में एसजीपीसी ने स्कूल को नोटिस भेजा था और स्कूल प्रबंधकों ने माफी मांग ली। बरगाड़ी मामले में एडवोकेट हरजिंदर सिंह ने कहा कि यह निंदनीय घटना है। इस मुद्दे पर सियासत नहीं होनी चाहिए।