पंजाब में प्लाट घोटाला मामले में विजिलेंस ने मुख्य आरोपी मनप्रीत बादल के तीसरे साथी विकास अरोड़ा को सोमवार सुबह चिंतपूर्णी से काबू किया है। रविवार को गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी राजीव कुमार एवं अमनदीप सिंह का सोमवार को विजिलेंस ने मेडिकल करवाने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया, जहां पर अदालत ने दाेनों आरोपियों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
वहीं, विजिलेंस की एक टीम ने मामले के मुख्य आरोपी मनप्रीत बादल के घर लंबी में दबिश दी तो दूसरी टीम ने उक्त मामले में नामजद तत्कालीन एडीसी एवं बीडीए प्रशासक बिक्रमजीत शेरगिल के एक ठिकाने पर दबिश दी, लेकिन दोनों आरोपी फरार मिले। इसके अलावा छठे आरोपी पंकज की गिरफ्तारी के लिए विजिलेंस की टीम प्रयास कर रही है।
विजिलेंस के प्रवक्ता ने सोमवार को मीडिया से जानकारी साझा करते हुए बताया कि उक्त मामले के शिकायतकर्ता पूर्व विधायक सरूप चंद सिंगला की शिकायत की जांच करने के बाद ही उक्त आरोपियों पर केस दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि जांच में पाया गया कि मनप्रीत बादल ने वर्ष 2018 से 2021 तक वित्त मंत्री रहते समय राजनीतिक दबाव के चलते माॅडल टाउन फेज 1 में 1560 वर्ग गज के दो महंगे प्लाट काम दाम पर खरीदे थे। इस कारण सरकार को करीब 65 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
प्रवक्ता ने बताया कि शिकायत नंबर 11-2022 की जांच दौरान पाया गया कि पूर्व वित्त मंत्री ने अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए बीडीए के अधिकारियों कर्मियों के साथ मिलीभगत कर वर्ष 2021 में प्लाटों की बोली दौरान आम लोगों को गुमराह करते हुए फर्जी नक्शे अपलोड करवाए गए थे, जिससे बोली प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी को रोका जा सकें।
अपलोड किए नक्शे में प्लाट नंबर 725 सी 560 गज, 726 जो 1000 गज को भी रिहाइशी के बजाय व्यापारिक दिखाया गया था और प्लाटों के नंबर आनलाइन ई आक्शन पोर्टल पर पाए नक्शे में नहीं दिखाए गए थे। इन प्लाटों की नीलामी के लिए बीडीए की महिला अधिकारी बलविंदर कौर के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग किया था।
विजिलेंस प्रवक्ता ने बताया कि जांच में सामने आया कि राजीव कुमार, विकास अरोड़ा और अमनदीप सिंह नामक व्यक्ति तीनों बोलीकारों की तरफ से एक ही वकील संजीव कुमार द्वारा एक ही आई पी एड्रेस से बोली की गई। उक्त प्लाट कम दाम पर खरीद कर मनप्रीत बादल, सुपरिंटेंडेंट पंकज, राजीव कुमार, विकास अरोड़ा, अमनदीप सिंह और उस समय के बीडीए प्रशासक बिक्रमजीत सिंह शेरगिल ने साजिश के तहत सरकार के साथ धोखाधड़ी कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया था।
प्रवक्ता ने बताया कि पूर्व वित्त मंत्री ने अलाटमेंट पत्र मिलने से पहले अपने जान-पहचान वाले बोलीकारों से एग्रीमेंट के जरिये दोनों प्लाट खरीद लिए थे। प्रवक्ता के अनुसार जांच में सामने आया कि मनप्रीत बादल ने सफल बोलीकारों को 25 फीसदी बयाना रकम पहले ही ट्रांसफर कर दी थी।
प्रवक्ता ने बताया कि उक्त मामले में नामजद मनप्रीत बादल, पीसीएस अधिकारी बिक्रमजीत शेरगिल एवं सुपरिंटेंडेंट पंकज की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। तीन आरोपियों राजीव कुमार, अमनदीप सिंह और विकास अरोड़ा को काबू किया जा चुका है। उक्त सभी आरोपियों के खिलाफ थाना विजिलेंस ब्यूरो में विभिन्न धाराओं के अलावा भ्रष्टाचार एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया है।
जब पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने दोनों प्लाट फर्जी तरीके से खरीद कर लिए तो उसके बाद मनप्रीत बादल ने मकान बनवाने के लिए मकान की नींव रखने संबंधी एक बडा समागम करवाया था। इस समागम में उस समय राज्य के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत कांग्रेस के अन्य नेता पहुंचे थे।
शहर में मकान बनाने का ड्रामा रचकर 2022 में लोगों से वोट बटोरना था मुख्य मकसद
मनप्रीत बादल ने 2022 के चुनाव से पहले माडल टाउन फेज 1 में दो व्यापारिक प्लाटों को रिहाइश के लिए उपयोग करने हेतु अपनी ही सरकार एवं पंजाब की जनता से धोखाधड़ी करते हुए महंगे दाम वाले दो प्लाट कम दाम पर खरीद कर लिए थे। इसके बाद मनप्रीत बादल द्वारा लोगों को चुनाव प्रचार के दौरान कहा जाने लगा था कि वो शहर में ही रहेंगे, इसलिए उनको वोट दिया जाए। मनप्रीत बादल उक्त विवादित प्लाटों में मकान बनाने का ड्रामा रखकर 2022 में लोगों से वोट बटोरने के मकसद से तेजी के साथ अपने विवादित प्लाटों में काम करवा रहे थे, लेकिन लोगों ने मनप्रीत बादल की नीतियों से दुखी होकर इस कदर मनप्रीत को जवाब दिया कि वो भारी मतों से अपनी ही पार्टी के पूर्व पार्षद जगरूप गिल से हार गए थे। इस हार के बाद मनप्रीत लगातार शहर से गायब हो गए थे।
जांच से बचने के लिए जनवरी 2023 में पकड़ा भाजपा का पल्ला
सूत्रों से पता चला है कि भाजपा नेता सरूप चंद सिंगला द्वारा मनप्रीत बादल के खिलाफ की गई शिकायत की जांच से बचने के लिए मनप्रीत बादल जनवरी 2023 में भाजपा अंदर शामिल हो गए थे, लेकिन शिकायतकर्ता भाजपा नेता सिंगला ने तब भी स्पष्ट कर दिया था कि वो अपनी शिकायत से पीछे नहीं हटेंगे।
इकरारनामे के लिए स्टाम्प पेपर पहले ही खरीद लिए थे-अलाटमेंट से चार दिन पहले ही कर लिए इकरारनामे
विजिलेंस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में जिक्र किया गया है कि मनप्रीत बादल ने 100-100 रुपये वाले स्टांप पेपर 30 सितंबर 2021 को ही खरीद करके रख लिए थे और उस पर इकरारनामा 4 अक्तूबर 2021 को लिखा गया और दोनों इकरारनामे पर एक ही व्यक्ति को गवाह रखा गया। बीडीए ने प्लाट का अलाटमेंट पत्र राजीव कुमार एवं विकास अरोड़ा के नाम पर 8 अक्तूबर को जारी किए गए थे।
बीडीए के अधिकारियों कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी नक्शे किए अपलोड
विजिलेंस जांच में सामने आया कि मनप्रीत बादल ने उक्त दोनों महंगे प्लाट सस्ते दाम पर खरीदने के लिए असल नक्शे को छिपा लिया जबकि बीडीए के अधिकारियों एवं कर्मियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी नक्शे अपलोड कर दिए।
तत्कालीन बीडीए प्रशासक एवं सुपरिंटेंडेंट ने महिला अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षरों को किया उपयोग
विजिलेंस जांच में सामने आया कि उस समय बीडीए के प्रशासक बिक्रमजीत सिंह शेरगिल और सुपरिंटेंडेंट पंकज ने मिलीभगत कर मनप्रीत बादल को फायदा पहुंचाने के लिए अपने ही कार्यालय की महिला अधिकारी से गद्दारी करते हुए उसके डिजिटल हस्ताक्षरों को उसकी बिना सहमति से उपयोग कर लिया था।