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पाकिस्तान में मनाई जाएगी पंजा साहिब की शताब्दी वर्ष गांठ

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अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि पंजा साहिब की शताब्दी वर्षगांठ के समागम पाकिस्तान में मनाए जाएंगे। एसजीपीसी इसके लिए पाकिस्तान सरकार से कम से कम पांच हजार श्रद्धालुओं के वीजे की मांग करेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान के मामले पर उन्होंने कहा कि यदि कोई गुरु घर की मर्यादा भंग करता है, तो वह गुरु घर का देनदार होगा। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की पिछले साल से चल रहे समागमों के भोग 21 अप्रैल को डाले जाएंगे। एडवोकेट धामी ने शनिवार को यह बात एसजीपीसी कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कही।
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उन्होंने कहा कि 30 अक्तूबर 1922 को गुरुद्वारा श्री पंजाब साहिब पाकिस्तान में हुए शहीदी साके के 100 साल पूरे होने पर एसजीपीसी की ओर से साके से संबंधित अलग-अलग पहलुओं संबंधी शोध कार्य करवाकर संग्रह तैयार करने के साथ साथ इस शताब्दी के समागमों के दौरान साके के आगू शहीद भाई करम सिंह और भाई प्रताप सिंह के परिवारिक सदस्यों को सम्मानित किया जाएगा। यह फैसला आज सिख इतिहास रिसर्च बोर्ड की हुई बैठक में लिया गया है।
इस साके की शताब्दी को लेकर भारत और पाकिस्तान में समागम किए जाएंगे। एसजीपीसी चाहती है कि श्रद्धालुओं का एक बहड़ा जत्था पाकिस्तान में होने वाले समागमों में हिस्सा ले, इसके लिए सरकारों के साथ पत्राचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि साका श्री पंजा साहिब से पहलेे गुरु का बाग के मोर्चे की 100 वर्षीय शताब्दी भी 8 अगस्त 2022 को मनाई जाएगी, जिस संबंधी अमृतसर के निकटतम गुरुद्वारा गुरु के साहिब घुकेवाली में समागम होंगे। उन्होंने बताया कि इस साल देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके आजादी के घुलाटियों में सिखों के योगदान को हर पक्ष से शोध कर प्रमाणित रुप में सामने लाया जाएगा। ताकि भविष्य की पीढ़ियां अपने शहीदों पर गर्व कर सकें। आजादी के संघर्ष के दौरान 80 फीसदी से ज्यादा कुर्बानियां सिखों ने दी हैं। दुख की बात है कि इन्हें मुख्य रूप में सामने नहीं लाया जाता।
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एडवोकेट धामी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से गुरु घर की मर्यादा भंग किए जाने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि अगर कोई गुरु घर की मर्यादा भंग करता है, तो वह गुरु घर का देनदार होगा। उन्होंनेकहा कि वर्तमान समय तक के सिख इतिहास तथ्य सामने लाने बेहद जरुरी हैं, जिस संबंध में कमेटी काम करेगी। इसी तरह अंडेमान की सैलुलर जेल, जिसे काले पानी की जेल भी कहा जाता है, में तसीहे भुगतने वाले सिखों का संग्रह भी जल्द ही संगत के हाथों में लाया जाएगा। इस संबंधी काम लगभग मुकम्मल हो चुका है, जिसे सिख इतिहास रिसर्च बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। लेकिन इसे माहिरों से एक बार और खोज करवाने के बाद ही प्रकाशित किया जाएगा।
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