श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने दिल्ली सिख मैनेजमेंट प्रबंधक कमेटी के प्रधान मनजिंदर सिंह सिरसा को भाजपा में शामिल किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि सिरसा को जेल का डर दिखा कर भाजपा में शामिल करवाया गया है। इसके लिए वहां के सिख जत्थेबंदियों के लोग, जिन्होंने सिरसा को भाजपा में शामिल करवाए जाने संबंधी जमीन तैयार की, भी जिम्मेदार हैं।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने कहा कि जब विदेशी हुक्मरान भारत आए और यहां कब्जा करने के बाद लोगों को धर्म या कर्म चुनने को कहा। जिन्हें धर्म प्यारा था, उन्होंने धर्म चुना। जिन्हें कर्म प्यारा था, उन्होंने कर्म चुना। जब मुगल शासक भारत आए तो उन्होंने लोगों को धर्म या जिंदगी में से किसी एक को चुनने को कहा। जिन्होंने जिंदगी चुनी, उन्होंने धर्म छोड़ दिया और जिन्होंने धर्म चुना उन्होंने जिंदगी को छोड़ दिया।
उन्होंने कहा कि कल सुबह ही सिरसा के साथ उनकी बात हुई थी। उन्हें लगा कि उनके सामने भी इसी तरह की पेशकश रखी गई होगी या तो भाजपा ज्वाइन करो या जेल जाओ। उन्होंने भाजपा को चुना। यह वही हुआ, जो मुगलों या उससे पहले आए विदेशी शासकों के दौर में हुआ। इसके लिए दिल्ली के खुद को सिख कहलवाने वाले नेता भी, जिन्होंने भाजपा में जाने के लिए जमीन तैयार की, जिम्मेदार हैं। यह उनकी राजनीतिक भूल भी है। कितनी हैरानी की बात है कि सिखों की वाहद जत्थेबंदी दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष और उनके 11 सदस्यों पर पर्चे दर्ज करवाए जाते हैं और फिर उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है। यह गलत है। हो सकता है कि वे दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का प्रबंध संभाल लें। लेकिन इसके लिए हमारे सिख भी जिम्मेदार हैं।
एसजीपीसी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान मनजिंदर सिंह सिरसा के अपने पद से इस्तीफे के बाद भाजपा में शामिल होने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और सिरसा के इस कदम की आलोचना की। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सिख संगतों ने सिरसा को बड़ा मान बख्शा और पार्टी ने उन्हें दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का प्रधान बनाया।