पाकिस्तान स्थित ननकाना साहब में लगा बोर्ड।
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अमृतसर। पाकिस्तान के जिला नारोवाल स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के एतिहासिक कुएं का जल देश-विदेश की संगत को बेचे जाने की कार्रवाई से समूचे सिख की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इसके लिए पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, इवेकुई ट्रस्ट प्रापर्टी बोर्ड और श्री करतारपुर साहिब प्रोजेक्ट के मैनेजमेंट यूनिट के अधिकारी और पदाधिकारी जवाबदेह हैं। कुछ सिख संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब में दिए जाने वाले प्रसाद के पैकेटों के अंदर पाकिस्तानी ब्रांड के सिगरेट के इश्तहारों की छपाई होने, गुरुद्वारा साहिब की परिक्रमा में पाकिस्तानी माडल की ओर से माडलिंग करने जैसे कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा गुरुद्वारा साहिब में जश्न-ए-बहारा प्रोग्राम की योजना सहित मर्यादा को बट्टा लगाने वाले पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं।
सिख नेताओं ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब में कुआं, जिसके बाबत कहा जाता है कि गुरु नानक देव जी इस कुएं का जल अपने खेतों में देते थे, इसका जल समूचे सिख भाईचारे और गुरु नानक नाम लेवा संगत के लिए अमृत जल के समान है। इसे पीएसजीपीसी और इवेकुई ट्रस्ट प्रापर्टी बोर्ड की मिलीभगत से बोतलों में बेचा जाना एक दुखद घटना है। उन्होंने पाकिस्तान मामलों के जानकार और इतिहासकार और शोधकर्ता सुरिंदर कोछड़ का धन्यवाद भी किया और कहा कि उनकी ओर से कुएं के पानी का मामला श्री करतारपुर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के कार्यकारी अधिकारी और इवेकुई ट्रस्ट प्रापर्टी बोर्ड के अतिरिक्त सचिव राणा शाहिद अलीम के सामने लाने पर अब सख्ती से जल बेचे जाने पर रोक लगाने संबंधी निर्देश जारी किए हैं। सीईओ ने यह पोस्टर गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के अंदर जगह-जगह लगवा दिए हैं कि भविष्य में कोई भी कुएं का जल बेचने की गलती नहीं करेगा।
सिख संगठनों के नेताओं ने कहा कि उक्त एतिहासिक कुएं के जल को शुद्ध करने के लिए होमलैंड ग्रुप की ओर से एक फिल्टरेशन प्लांट भी लगाया है। इसका जल बेचने का ठेका इकबाल सिद्धू नामक पाकिस्तानी को दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि इससे कई साल पहले 2016 में पीएसजीपीसी की ओर से जब पाकिस्तान के बीच गुरुद्वारों के एतिहासिक सरोवरों और कुओं के जल का विश्व भर में निर्यात किए जाने का एलान करते हुए फिल्टर प्लांट लगाने की कार्रवाई शुरू की, तो उस वक्त भी इतिहासकार कोछड़ ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि विश्व के किसी भी देश की सरकार या गुरुद्वारा कमेटी को वहां के गुरुद्वारों के जल बेचने की गलती नहीं करनी चाहिए। जबकि ईटीपीबी और पीएसजीपीसी समूचे सिख जगत की धार्मिक भावनाओं और सिख धर्म का व्यापारीकरण करने की योजनाओं को अमली रूप देने के प्रयास कर रहीं हैं, जिसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।