अमृतसर में जलियांवाला बाग स्मारक का उद्घाटन किया गया।
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पंजाब सरकार ने 1919 में हुए जलियांवाला बाग के शहीदों की असली संख्या और उनके घरों का पता लगाने के लिए अमृतसर की गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में एक चेयर स्थापित करने का फैसला किया है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार दोपहर अमृतसर के आनंद पार्क में जलियांवाला बाग शताब्दी स्मारक का वर्चुअल नींव पत्थर रखा।
इस स्मारक के निर्माण में शहीदों के घरों और गांवों की मिट्टी का इस्तेमाल किया जाएगा। यह पावन मिट्टी स्मारक की नींव में डाली जाएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों के गांवों में भी छोटे शहीदी स्मारक स्थापित किए जाएंगे।
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देश की आजादी में शहादत का जाम पीने वाले कालापानी के शहीदों की याद में भी सरकार एक स्मारक की स्थापना करेगी। हालांकि यह स्मारक कहां बनेगा, इस बारे में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट नहीं किया।
वहीं जलियांवाला बाग से पांच किमी दूर स्थित आनंद पार्क में शहीदों की याद में स्थापित किए जाने वाले ‘शहीद स्मारक’ का विरोध भी शुरू हो गया है। जलियांवाला बाग मेमोरियल ट्रस्ट के ट्रस्टी राज्य सभा के सांसद श्वेत मलिक पहले ही अपना विरोध जता चुके हैं। ट्रस्टी पूर्व सांसद त्रिलोचन सिंह ने कहा कि इस स्मारक की कोई भी जरूरत नहीं है।
उन्होंने पंजाब के पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी को इस प्रकार का स्मारक नहीं बनाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि वह शहीदों के परिजनों के सम्मान के लिए कार्यक्रम करें लेकिन जलियांवाला बाग को छोड़कर कहीं और एक नए स्मारक की स्थापना न करें। शहीदों के स्मारक लिए जलियांवाला बाग में पर्याप्त जगह थी।
पंजाब कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता डॉ. राजकुमार वेरका ने पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने सौंदर्यीकरण के नाम पर शहीद स्थली की विरासत को ही नष्ट कर डाला है। शहीदों की यादगार देश के किसी भी कोने में बनाई जा सकती है। भाजपा जलियांवाला बाग के शहीदों के नाम पर स्थापित किए जाने वाले स्मारक को लेकर मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रही है।