अमृतसर में पत्रकारों से बात करते नवजोत सिद्धू।
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पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को अमृतसर में राज्य के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह को अपना बड़ा भाई बताया। हालांकि इसके तुरंत बाद ही सिद्धू ने चन्नी को नशे और बेअदबी के मामले में घेर लिया। प्रताप नगर इलाके में सिद्धू ने कहा कि नशा खत्म करना और बेअदबी मामलों में सजा दिलाना, उनके दो मुद्दे हैं और अपने इन मुद्दों से वे कभी पीछे नहीं हटेंगे।
सिद्धू ने कहा कि राज्य में नशा खत्म करने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री को बदला गया है। इसे लेकर हाईकोर्ट ने तीन बार निर्देश जारी किए और कहा कि नशाखोरी को राजनीतिक संरक्षण हासिल है और नशा खत्म करने के नाम पर सिर्फ छोटी मछलियों पर कार्रवाई कर इसमें शामिल बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। राजनीतिक प्रभाव के चलते सुमेध सिंह सैनी को ब्लैंकेट बेल दिलवाई गई। सैनी की ब्लैंकेट बेल को तुड़वाए बिना इंसाफ नहीं मिल सकता। सैनी की ब्लैंकेट बेल के खिलाफ सरकार को एसएलपी डालनी चाहिए थी, पर सरकार की इस लापरवाही पर लोग सरकार की नीयत पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि जब ट्रामाडोल की 12 लाख गोली पकड़ी गई, तब भी हाईकोर्ट ने इसमें राजनीतिक लोगों का सरंक्षण होने की बात कही थी। रिपोर्ट में पंजाब में ड्रग का अपराध देश का सबसे बड़ा होने की बात कही गई है। इसमें ईडी ने हाईकोर्ट के आदेशों पर नवंबर 2017 में नशे के कारोबार की रिपोर्ट एसटीएफ को सौंपी थी जिसे फरवरी 2018 में हाईकोर्ट में दायर की। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद कार्रवाई नहीं किया जाना समझ नहीं आ रहा।
उन्होंने कहा कि हाथ में गुटका साहिब की सौगंध लेकर चार सप्ताह में पंजाब से नशा खत्म करने वाले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह आज अपने शहर पटियाला के मेयर को बचा रहे हैं। जब उन्हें कहा गया कि पंजाब की मौजूदा सरकार में उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं तो उन्होंने कहा कि रेत के मामले में उनके कहने पर ही कार्रवाई की गई है। बिजली के बिलों को कम करने की भी उनकी मांग पर उनके बड़े भाई चन्नी की सरकार में काम हो रहा है।
वहीं पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ पर हमला करते हुए सिद्धू ने कहा कि उन्होंने पहले यह कभी मसला नहीं उठाया और अब ट्वीट डालने में व्यस्त हैं। इस दौरान सिद्धू ने किसान आंदोलन को सामाजिक आंदोलन का नाम देते हुए शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि दी। तीन कृषि कानून वापस लिए जाने के फैसले पर उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के सामने झुक गई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की जीत तभी होगी जब यह आंदोलन किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाएगा।