पाकिस्तान के कराची की मलेर जेल से रिहाई के बाद 20 भारतीय मछुआरे सोमवार को शाम अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत लौट आए। जेसीपी अटारी पर प्रोटोकाल अधिकारी अरुण माहल और गुजरात के फिशरी विभाग के सुपरिंटेंडेंट ने इन्हें अटारी बार्डर पर रिसीव किया। एसएसपी देहाती स्वर्णदीप सिंह की हिदायतों के मुताबिक इनका कस्टम व इमिग्रेशन करवाए जाने के बाद सुरक्षा के बीच रेडक्रास भवन में पहुंचाया गया, जहां अगले एक-दो दिनों में गुजरात से यहां पहुंचे अधिकारी इन्हें अपने साथ लेकर रवाना होंगे।
जानकारी के मुताबिक गुजरात के नानजी, काहन, दानिश, मेरु, लालजी, भाना, डेरसी, रमेश, मनू, अकील, जीवा, दानिश, दाना, अबु नासिर, जनून, अमीन, अनीस और प्रीत समेत कुल 20 भारतीय नागरिक अक्तूबर 2018 में अलग-अलग समय में पाकिस्तान की कोस्टल गार्ड ने गिरफ्तार किए थे। इन भारतीय बंदियों को पाकिस्तान सरकार ने कराची की मलेर जेल में रखा था, जहां अदालत ने इन्हें 4 साल की कैद सुनाई थी।
भारत सरकार की तरफ से इनकी औपचारिकताएं पूरी किए जाने के बाद पाकिस्तान सरकार ने सजा पूरी होने पर सोमवार को इन्हें कराची जेल से रिहा कर दिया। जेसीपी अटारी पर प्रोटोकाल अधिकारी अरुण माहल ने बताया कि सोमवार को कुल 20 बंदी पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अटारी जीरो लाइन पार कर भारत पहुंचे।
इनमें से 13 बंदी गुजरात के जिला सोमनाथ, 6 बंदी भूमि जिले के और 1 बंदी जामनगर का है। गुजरात से अटारी पहुंचे फिशरी विभाग के सुपरिंटेंडेंट एमएल कलोटिया अपने तीन सहायक सुपरिंटेंडेंट्स और 3 पुलिस अधिकारियों के साथ बंदियों को लेकर देर शाम रेडक्रास भवन पहुंचे।
भारतीयों को रिहा किया जाए, भोजन का घोर अभाव
एक मछुआरे ने कहा कि हम 4 साल बाद वापस आ रहे हैं। पाकिस्तान में फंसे भारतीयों को रिहा किया जाए। भोजन का घोर अभाव है। यदि वे समय पर नहीं आते हैं, तो उनके शरीर भारत आ जाएंगे।