फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्री गुरु तेग बहादुर का प्रकाश पर्व: गुरु जी के प्रति कश्मीरी पंडितों के दिल में गजब की श्रद्धा, अपने ईष्ट देव के साथ रोजाना गुरु जी को भी करते हैं नमन

Sun, 24 Apr 2022 11:35 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)

सार

अमृतसर में आज कश्मीरी पंडितों के करीब 40 घर हैं, जहां रोजाना सुबह अपने ईष्ट की पूजा के साथ-साथ श्री गुरु तेग बहादुर जी को रोजाना प्रणाम किया जाता है। 
विज्ञापन
अमृतसर निवासी कश्मीरी पंडित ओ एन भट्ट। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाशपर्व को कश्मीरी पंडित धन्यवाद दिवस के रूप में मनाते हैं। इसकी जानकारी खुद कश्मीरी पंडितों ने ही दी। उनका कहना है कि गुरु साहिब को यूं ही हिंद की चादर नहीं कहा जाता, उन्होंने दूसरों के लिए अपनी जान कुर्बान की थी। विश्व में त्याग की ऐसी कोई दूसरी मिसाल नहीं है। तभी तो हर कश्मीरी पंडित गुरु साहिबान का दिल की गहराइयों से सम्मान करता है। 

विज्ञापन


रानी का बाग निवासी कश्मीरी पंडित ओ एन भट्ट ने बताया कि वे 45 साल पहले कश्मीर छोड़कर अमृतसर आ गए थे और हिंदू कॉलेज में अंग्रेजी पढ़ाने लगे। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले जहां मुसलमान हाकिमों ने कश्मीरी पंडितों का कत्लेआम किया, वहीं कश्मीर की सरकारों ने भी इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी। मजबूरन कश्मीरी पंडितों को अपने बसे बसाए घरों को छोड़कर अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा।

उन्होंने बताया कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का कश्मीरी पंडितों के साथ कोई रिश्ता नहीं था, उन्होंने उनके पूर्वजों के लिए अपनी कुर्बानी दी। तब से लेकर आज तक कश्मीरी पंडित, जहां-जहां हैं, वहीं श्री गुरु तेग बहादुर जी के पर्व को धन्यवाद दिवस के रूप में मनाकर उन्हें याद करते हैं। अमृतसर में आज कश्मीरी पंडितों के करीब 40 घर हैं, जहां रोजाना सुबह अपने ईष्ट की पूजा के साथ-साथ श्री गुरु तेग बहादुर जी को रोजाना प्रणाम किया जाता है। 
विज्ञापन


कश्मीरी पंडित सभा, अमृतसर के सचिव कमल कृष्ण कौल ने बताया कि सभा की बैठक में हम यह प्रस्ताव पारित करने वाले हैं कि आने वाली पीढ़ियों को गुरु तेग बहादुर जी की बलिदान गाथा से अवगत कराया जाएगा। वैसे तो कश्मीरी पंडित रोजाना ही श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को अपने घरों में याद करते हैं मगर गुरु पर्व के लिए विशेष तौर पर सभा की बैठक कर प्रस्ताव पारित किया जाता है। 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें