पंजाब में विभिन्न मांगों को लेकर दबाव बनाने के उद्देश्य से पनबस के कांट्रैक्ट कर्मचारियों ने दूसरे दिन शनिवार को भी चक्काजाम रख कर धरना दिया। इसके कारण पंजाब में कई जगहों पर लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा। आंदोलनकारी कर्मचारियों ने दावा किया कि पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन के दौरान विभिन्न डिपो की 2000 से ज्यादा बसें सड़कों पर नहीं उतरीं।
कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की हड़ताल के कारण मोगा, लुधियाना, अमृतसर और फिरोजपुर समेत राज्य के विभिन्न जिलों में बसें न चलने के कारण यात्री सवारियों के लिए भटकते रहे। कुछ यात्रियों का कहना था कि उन्हें गन्तव्य तक पहुंचने के लिए प्राइवेट बसों या टैक्सियों का सहारा लेना पड़ा।
जालंधर में पंजाब रोडवेज-पनबस ठेका मुलाजिम यूनियन के प्रधान चानण सिंह ने कहा कि ठेके पर रखे जा रहे कर्मचारियों के पास न तो कोई तजुर्बा है और न ही प्रशिक्षण। सरकार 9100 रुपये के वेतन पर उन्हें ठेके पर भर्ती कर लोगों की जान जोखिम में डाल रही है। जिन चालकों को भर्ती किया जा रहा है न तो उनका कोई टेस्ट लिया गया और न ही प्रशिक्षित किया गया।
लुधियाना में ठेका मुलाजिम यूनियन के नेता गुरशरण सिंह ने आरोप लगाया कि आप सरकार वायदे से मुकर रही है। पहले से ठेके पर काम कर रहे कर्मियों को पक्का नहीं कर रही जबकि आउटसोर्स के जरिए मुलाजिमों को भर्ती किया जा रहा है। अमृतसर में ठेका मुलाजिमों ने बस अड्डे पर धरना दिया।
अमृतसर के दोनो रोडवेज डिपो की करीब 352 बसें शनिवार को भी नहीं चली। यूनियन के पदाधिकारियों हीरा सिहं, जसपाल सिंह, बलविंदर सिंह व मंजीत सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार ने दोबारा सोमवार को मुख्यसचिव के साथ बातचीत का समय दिया है। जब तक उनकी मांगें मान नहीं ली जाती तब तक पनबस कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहेगी।