अमृतसर। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब की ओर से प्रदेश अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू एवं प्रदेश महासचिव सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व में,दिल्ली मोर्चा की दूसरी वर्षगांठ 26 नवंबर से चल रहे मोर्चों के दौरान, 15 दिसंबर से 9 जिलों के डीसी कार्यालयों के साथ ही 10 जिलों की सड़कों को टोल फ्री कर दिया गया है। अमृतसर में किसानों ने टोल प्लाजा मानवाला, छिड़न और कत्थूनंगल में दूसरे दिन भी रोष प्रदर्शन जारी रखा। प्रदर्शनकारी किसान सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।
किसान मजदूर नेताओं ने अलग अलग टोल प्लाजा पर दिए धरनों के दौरान संबोधित करते हुए कहा कि कि कारपोरेट जगत सरकारों को नियंत्रित कर रहा है, जिसके कारण आम नागरिकों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिसके परिणामस्वरूप अब रोड टोल प्लाजों को एक माह के लिए बंद कर दिया गया है और सीधे कारपोरेट्स को टारगेट करने का अभियान शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि पंजाब रोडवेज, पनबस पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब से प्रदेश नेता योद्ध सिंह व हीरा सिंह व प्राइवेट ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन से प्रदेश अध्यक्ष दिलबाग सिंह चाटीविंड, मेजर सिंह वरपाल, दया सिंह माछिके व अन्य संगठन मोर्चे को समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि आंदोलन ने गति पकड़ ली है।
अब कारपोरेट समर्थक ताकतें इसे बदनाम कर आंदोलन को पटरी से उतारने की कोशिश करेंगी। तरह-तरह से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश करेंगी। चाहे वह धार्मिक भावनाओं को भड़काकर हो या किसी तरह दूसरे देशों से खतरा बताकर हो, आंदोलनकारियों को आतंकवादी कहने या पंजाब के आर्थिक नुकसान का बहाना बनाकर आंदोलन को बदनाम करने की भी कोशिश होगी। उन्होंने कहा कि हम पंजाब के लोगों को पहले ही स्पष्ट कर रहे हैं कि वे इस तरह की साजिशों से वाकिफ हों और वास्तविक सरोकारों के संघर्ष पर डटे रहें।
उन्होंने कहा कि आज समय आंदोलन की रक्षा करने का है, ताकि जनहित की लड़ाई सफलतापूर्वक लड़ी जा सके। इस मौके पर प्रदेश नेता गुरबचन सिंह चब्बा ने सभी कलाकारों, फिल्मी हस्तियों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और देश के प्रति ईमानदार लोगों से आंदोलन का समर्थन करने की अपील की और कहा कि यह लड़ाई पूरे समाज की है, इसलिए सभी को इस लड़ाई में शामिल होना चाहिए। नेताओं ने कहा कि यदि सरकार 17 फसल की गारंटी कानून बनाने, नशामुक्ति की व्यवस्था करने और प्रभावित युवाओं को मुख्यधारा में लाने, मजदूरों किसानों की पूर्ण कर्ज मुक्ति, मनरेगा मजदूरों का बकाया, जल नीति आदि जायज मांगों और भ्रातृ संगठनो की मांगो को स्वीकार किया जाए। यदि सरकार की तरफ से मुश्किलों के समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज किया जाएगा।