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कोविड-19 के दौरान फंसे अटारी सीमा के रास्ते लौटे 17 नागरिक

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कोविड काल के दौरान भारत में फंसे 17 पाकिस्तानी नागरिक मंगलवार को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते अपने वतन लौट गए। पाकिस्तान जाने के लिए 5 अगस्त को अटारी पहुंचे 51 पाकिस्तानी हिंदू नागरिकों के जत्थे के लोग मंगलवार को भी अपने वतन नहीं जा सके।
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पाकिस्तान के हरीक कुमार ने बताया कि मंगलवार को वह अपनी पत्नी चंपा कुमारी, बेटी दिशा और बेटे अमित के साथ अपने वतन लौट रहा है। तीन माह पहले भी उसने इंदौर में रहते हुए वतन लौटने की इजाजत ली थी, लेकिन तब रास्ते बंद होने के चलते वह वापस नहीं जा सका। उसने बताया कि उसकी माता की पाकिस्तान में तबीयत ठीक नहीं होने के चलते उसे काफी चिंता थी, लेकिन अब वह बहुत जल्द अपनी मां से मिल सकेगा। पाकिस्तान लौटते समय कई लोगों ने बताया कि भारत से लौटने का उनका मन नहीं कर रहा था, मगर घर लौटना उनकी मजबूरी है। इस दौरान कई पाक नागरिकों ने जय हिंद के नारे भी लगाए।
पांच अगस्त को अटारी पहुंचे हिंदू जत्थे में शामिल भागमल ने बताया कि तब उन्हें पाकिस्तान जाने की इजाजत नहीं मिली थी। उन्होंने पहले कि 5 अगस्त को पहले एक शैक्षणिक संस्थान में उन्हें ठहराया गया, लेकिन बाद में उन्हें दुर्ग्याणा मंदिर की सराय में शरण लेनी पड़ी। मंगलवार को वे लोग कोविड का रेपिड टेस्ट करवाकर वाघा पहुंचे तो पाकिस्तान रेंजर्स ने उन्हें लेने से इनकार कर दिया और कहा कि वे आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट लेकर आने को कहा। इसके बाद वे दोबारा दुर्ग्याणा मंदिर की सराय में पहुंच गए। उन्होंने बताया कि कोविड काल के दौरान जो कुछ भी उनके पास था, सब खत्म हो गया।
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ज्वाइंट चेक पोस्ट अटारी पर देहाती पुलिस के तैनात प्रोटोकाल अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि गृह मंत्रालय की ओर से मंगलवार को पाकिस्तान जाने वालों की दो अलग-अलग लिस्टें आई थी। एक लिस्ट में 138 लोगों के जबकि दूसरी लिस्ट में 17 लोगों के नाम शामिल थे। इसके अलावा 5 अगस्त को जयपुर (राजस्थान) से अटारी आए 51 पाकिस्तानी नागरिकों को भी मंगलवार को वतन लौटना था। इस तरह कुल 206 पाकिस्तानी नागरिकों को जीरो लाइन पार करके वाघा की ओर जाना था लेकिन देर सायं तक करीब 17 लोग ही वतन लौट सके। जबकि 51 लोगों का जत्था वापस दुर्ग्याणा मंदिर चला गया अन्य लोग ट्रांसपोर्ट की समस्या के चलते अटारी सीमा पर ही नहीं पहुंच सके।
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