कृषि प्रधान समाज होना एक बात है और इसके बारे में जानना दूसरी बात। गांवों से शहरों की ओर लगातर हुए पलायन और शहरीकरण की वजह से लोग कृषि से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में लंदन में खेतों को शहरों में लोगों के करीब लाकर इनके बारे में बताने की पहल की गई है। इससे प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। इस तरह की जाने वाली खेती को माइक्रो-फार्मिंग नाम दिया गया है। वर्टिकल फार्मिंग का चलन करीब 10 साल पुराना है। लेकिन अब उसे भी नियंत्रित वातावरण में किया जा रहा है।
रोका लंदन गैलरी की तरफ से शनिवार को एग्रीटेक्चर नाम से प्रदर्शनी शुरू हुई, जो 18 मई तक चलेगी। इसके तहत अलग-अलग जगहों पर आधुनिक खेती के तरीके दिखाए गए हैं। इसमें शहरों में कॉमर्शियल फार्मिंग पर फोकस किया गया है।
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खेती ने नए तरीके
- फोटो : Agritecture
अंडरग्राउंड खेती की भी जानकारी
यहां शहर के भीतर अंडरग्राउंड खेती की भी जानकारी दी गई है। ग्रोइंग अंडरग्राउंड नाम की कंपनी लंदन में 33 मीटर नीचे सलाद के पौधों की खेती कर रही है। दूसरे विश्व युद्ध के समय बम के हमले से बचने के लिए यह जगह बनाई गई थी।
यहां खेती के कई फायदे हैं। अंडरग्राउंड होने के कारण यहां तापमान कभी 15 डिग्री से नीचे नहीं जाता है। एक हफ्ते से भी कम समय में पौधे तैयार हो जाते हैं। पारंपरिक फार्म में साल में 7 फसलें तैयार हो पाती हैं, यहां साल में 60 फसलें लेते हैं।
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- फोटो : Agritecture
फ्लोटिंग फार्म में दूध की प्रोसेसिंग भी की जाएगी
यह फ्लोटिंग फार्म नीदरलैंड के रॉटरडम में है। फार्म में गायें भी हैं। यहीं पर दूध की प्रोसेसिंग भी की जाएगी। इसका मकसद आम लोगों और छात्रों को डेयरी प्रोडक्शन के बारे में बताना है।
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- फोटो : Agritecture
घरों के ऊपर पारदर्शी सोलर मॉड्यूल
नीदरलैंड्स के अल्मेरे में री-जेन (रीजेनरेटिव) विलेज का मॉडल बनाया गया है। यह पूरी तरह आत्मनिर्भर है। यहां पारदर्शी सोलर मॉड्यूल लगाए गए हैं। इनसे बिजली तो बनती ही है, पौधों को सूरज की रौशनी भी मिलती है। यह ऑफ-ग्रिड है यानी यहां बाहर से बिजली सप्लाई नहीं होती है।
रिसाइकिल्ड चीजों से वर्टिकल खेत, ऑर्गेनिक कचरे से खाद
ग्रीनबेली नाम की कंपनी घरों की दीवारों के साथ वर्टिकल खेत तैयार करती है। इसे बनाने में रिसाइकिल्ड चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। आस-पास के घरों के ऑर्गेनिक कचरे से खाद बनाकर पौधों में डाली जाती है।