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रूस में जयशंकर: मजबूत हुए हमारे संबंध, आजाद अफगानिस्तान के लिए हम प्रतिबद्ध

Fri, 09 Jul 2021 09:40 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को

सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में कहा कि 'समय की कसौटी पर खरा और विश्वास आधारित' रिश्ता मजबूत बना हुआ है और बढ़ रहा है। दोनों विदेश मंत्रियों ने मित्र राष्ट्रों के बीच अंतरिक्ष, परमाणु, उर्जा और रक्षा सहयोग के क्षेत्र में प्रगति की समीक्षा की। तीन दिवसीय दौरे पर यहां आए जयशंकर ने अफगानिस्तान, ईरान और सीरिया में स्थिति जैसे वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : twitter.com/DrSJaishankar
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विस्तार
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जयशंकर ने कहा कि इस तथ्य के बावजूद कि हमारी दुनिया में कई वस्तुओं और स्थितियों में बदलाव आ रहा है, पहले भी और कोविड के दौरान भी, समय और विश्वास पर आधारित हमारे संबंध बहुत मजबूत हुए हैं और लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर हमारी आर्थिक भागीदारी और विज्ञान व प्रौद्योगिकी भागीदारी बहुत सकारात्मक है। 

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विदेश मंत्री ने कहा कि मैं कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान रूस से मिले समर्थन के लिए उसकी प्रशंसा करता हूं। अब भारत स्पुतनिक वी वैक्सीन के उत्पादन और उपयोग में रूस का भागीदार बन गया है। उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि यह न केवल हम दोनों देशों के लिए अच्छा है बल्कि बाकी दुनिया पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

'अफगानिस्तान में शांति के लिए भारत-रूस का साथ काम करना जरूरी'
अफगानिस्तान में हालात को लेकर जयशंकर ने कहा कि इस मुद्दे ने हमारा बहुत ध्यान खींचा है क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। हम मानते हैं कि आज की जरूरत हिंसा में कमी लाना है। उन्होंने कहा, 'अगर हमें अफगानिस्तान और उसके आसपास शांति स्थापित करनी है तो भारत व रूस का साथ काम करना बहुत जरूरी है...।'
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जयशंकर ने आगे कहा, '...ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आर्थिक, सामाजिक दृष्टि से बहुत प्रगति बनी रहे। हम एक स्वतंत्र, संप्रभु और लोकतांत्रिक अफगानिस्तान के लिए प्रतिबद्ध हैं।' इससे पहले गुरुवार को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा था कि भारत और रूस के संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया के सबसे प्रमुख स्थिर संबंधों में से एक हैं।
 

The situation in Afghanistan occupied a lot of our attention because it has a direct implication for regional security. We believe that the immediate need of the day is really a reduction in violence: EAM Jaishankar in Russia. pic.twitter.com/U4DXxANoS1

— ANI (@ANI) July 9, 2021

उन्होंने कहा, निश्चित तौर पर हम अफगानिस्तान में घटनाओं से चिंतित हैं। युद्धग्रस्त देश में किसे शासन करना चाहिए, यह 'वैध पहलू' महत्वपूर्ण है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी तब आई है जब 11 सितंबर तक अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के मद्देनजर तालिबानियों ने दर्जनों जिलों पर अपना कब्जा कर लिया है। 
 

जयशंकर आज से जॉर्जिया की दो दिवसीय यात्रा पर

विदेश मंत्री आज जॉर्जिया की दो दिवसीय यात्रा पर जाएंगे और इस दौरान वह वहां अपने समकक्ष के साथ द्विपक्षीय संबंधों के विविध पक्षों और क्षेत्रीय व वैश्विक हितों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि किसी भारतीय विदेश मंत्री की स्वतंत्र जॉर्जिया की यह पहली यात्रा होगी। 

मंत्रालय ने कहा कि जयशंकर, जॉर्जिया के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री डेविड जलकलियानी के आमंत्रण पर नौ और 10 जुलाई को जॉर्जिया की यात्रा करेंगे। इस दौरान वह अपने समकक्ष के साथ  बैठक करेंगे। द्विपक्षीय संबंधों के विविध पक्षों पर बातचीत होगी और क्षेत्रीय व वैश्विक हितों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान होगा।
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रूसी समकक्ष के साथ परमाणु,अंतरिक्ष और रक्षा सहयोग पर चर्चा

जयशंकर ने कहा कि दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच इस साल बाद में होने वाली शिखर बैठक की तैयारियों को लेकर अच्छी प्रगति की। उन्होंने कहा, 'मैं कहूंगा कि बातचीत हमेशा की तरह बेहद गर्मजोशी के साथ, आरामदायक, समग्र और उत्पादक तरीके से हुई।'

विदेश मंत्री ने कहा कि मेरा मानना है कि बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में हमारा विश्वास एक साथ हमारे काम करने को इतना स्वाभाविक व सुगम बनाता है। हम 21वीं सदी में इसे अंतर-राष्ट्रीय संबंधों के विकास की एक बेहद स्वाभाविक व अपरिहार्य प्रक्रिया का प्रतिबिंब मानते हैं।

उन्होंने कहा, हमने वास्तव में काफी अच्छी प्रगति की है भले ही बीते एक साल में इनमें से काफी कुछ डिजिटल संपर्क के माध्यमों से हुआ लेकिन मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि जब इस साल वार्षिक द्विपक्षीय बैठक होगी तब हमारे सहयोग में विकास और प्रगति काफी कुछ आपके समक्ष प्रदर्शित होगी।

जयशंकर ने कहा, 'हमारे रिश्तों में एक नया आयाम जुड़ा है और वह विदेश और रक्षा मंत्रियों के 2+2 डायलॉग आयोजित करने को लेकर हुआ समझौता है। हमें लगता है कि हमें इस साल परस्पर सुविधा के मुताबिक किसी समय इसे करना चाहिए। हम अपने रिश्तों के समग्र विकास से संतुष्ट हैं।'

उन्होंने कहा, हमारे सहयोग का काफी कुछ अंतरिक्ष, परमाणु, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में केंद्रित है। कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना पटरी पर है। उन्होंने कहा कि रूस अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का मूल और सबसे मजबूत साझेदार है और अंतरिक का हमारे रिश्तों के लिए व्यवहारिक व प्रतीकात्मक महत्व दोनों है।

विदेश मंत्री ने कहा, 'बीते कुछ वर्षों में ऊर्जा सहयोग महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा है और तेल व गैस के क्षेत्र में संभावित निवेशों और दीर्घकालिक निवेश की प्रतिबद्धताओं से यह परिलक्षित होता है।” उन्होंने कहा, “रक्षा सैन्य-तकनीकी सहयोग पर मैं कहूंगा कि ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम में रूसी रूचि से औद्योगिक सहयोग मजबूत हुआ है।'

दोनों विदेश मंत्रियों ने अंतर-क्षेत्रीय सहयोग खासकर रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, हमने बात की कि हम इसे कैसे आगे लेकर जा सकते हैं, कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर होने हैं। हमने संपर्कता पर चर्चा की खास तौर पर उत्तर-दक्षिण गलियारा… चेन्नई व्लाडिवोस्टक पूर्वी समुद्री गलियारे पर भी।

दोनों नेताओं ने ब्रिक्स और आरआईसी में सहयोग पर भी चर्चा की। भारत फिलहाल ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) और आरआईसी (रूस, भारत, चीन) समूहों का अध्यक्ष है। सीरिया और लीबिया में स्थिति पर भी चर्चा हुई।

जयशंकर ने हिंद-प्रशांत पर भी अपना नजरिया साझा किया। इस क्षेत्र में चीन का आक्रामक रुख देखा गया है। उन्होंने कहा, निश्चित तौर पर रूस के साथ हमारी व्यापक भू-राजनीतिक अनुकूलता के कारण इस क्षेत्र में हम रूस की अधिक सक्रिय मौजूदगी और भागीदारी को बेहद महत्वपूर्ण रूप में देखते हैं।
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