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इन्होंने सिविल सेवा को कहा ना और संवार दी कईयों की जिंदगी

Thu, 17 Mar 2016 03:26 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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रितेश गर्ग - फोटो : file photo
सिविल सेवा में कामयाबी के साथ ही बैंक पीओ की नौकरी छोड़कर रुड़की के रितेश गर्ग ने कईयों की जिंदगी संवार दी है। रितेश उत्तराखंड से पलायन रोकने की मुहिम में लगे हुए हैं।
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सिविल सेवा को कहा ना और संवार दी कईयों की जिंदगी

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रितेश गर्ग - फोटो : file photo
रितेश लगातार तीन साल से प्रदेश में युवा प्रेरणा यात्रा के माध्यम से स्टार्ट अप कराकर गांव के लोगों को अपने उद्यम स्थापित कराने को प्रेरित कर रहे हैं। उनकी इस यात्रा से अब तक प्रदेश में 35 लोग अपने उद्यम स्थापित कर पलायन करने वालों को वापस बुला चुके हैं। इस साल फिर तीन अप्रैल से यात्रा निकालने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
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सिविल सेवा को कहा ना और संवार दी कईयों की जिंदगी

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रितेश गर्ग ने सिविल सेवा को कहा ना - फोटो : file photo
रुड़की के मंगलौर निवासी रितेश गर्ग ने सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली लेकिन गए नहीं। इसके बाद बैंक पीओ के लिए चयन हो गया लेकिन वह नहीं गए। उनका मन प्रदेश के लिए कुछ करने का था। इसलिए, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री हासिल की। तय मकसद के हिसाब से ‘आई फॉर नेशन फाउंडेशन’ की स्थापना की।

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रितेश गर्ग ने सिविल सेवा को कहा ना - फोटो : file photo
तीन साल पहले युवा प्रेरणा यात्रा शुरू की। सात दिन की यह खास यात्रा अपने साथ 100 सदस्यों को लेकर जाती है और उन्हें गांव-गांव में जागरूकता बढ़ाने के साथ ही खुद के उद्यम चला रहे लोगों से मिलवाया जाता है।
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रितेश गर्ग ने सिविल सेवा को कहा ना - फोटो : file photo
रितेश ने बताया कि उनकी इस मुहिम से जुड़े हुए 35 लोग अब अपने ही घर पर अपने छोटे उद्यम चला रहे हैं। कई लोगों ने अपने साथ उन युवाओं को जोड़ लिया है जो कि नौकरी के लिए प्रदेश से पलायन कर चुके थे।
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‌रितेश गर्ग ने सिविल सेवा को कहा ना - फोटो : file photo
रितेश अब तीन अप्रैल से दून विवि से यात्रा की शुरुआत करेंगे। रितेश ने बताया कि युवा प्रेरणा यात्रा के दो मकसद होते हैं। एक तो इन सभी 100 यात्रियों को विभिन्न उद्यमियों से मिलाकर कम खर्च में बेहतर उद्यम स्थापित करने की जानकारी देना और दूसरा गांव के लोगों को इन उद्यमों से जोड़ने के लिए जागरूक करना।
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रितेश गर्ग ने सिविल सेवा को कहा ना - फोटो : file photo
हर साल आई फॉर नेशन फाउंडेशन की ओर से तीन अप्रैल को दून विश्वविद्यालय से युवा प्रेरणा यात्रा शुरू होती है। यह यात्रा सबसे पहले रामगढ़ जाती है। यहां से पुरकुल गांव, यमुना ब्रिज होते हुए नौंगाव पहुंचती है।

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रितेश गर्ग ने सिविल सेवा को कहा ना - फोटो : file photo
नौंगाव से धारी कलोगी जाती है, जहां फार्मा प्रोड्यूसर कंपनीज के एक्सपर्ट जानकारी देते हैं। इसके बाद यात्रा सिद्ध गांव से धनोल्टी इको पार्क पहुंचती है। यहां से ऋषिकेश में रुकने के बाद व्यासी जाती है।
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रितेश गर्ग ने सिविल सेवा को कहा ना - फोटो : file photo
व्यासी से हरिद्वार और फिर गुरुकुल कांगड़ी विवि में नौ अप्रैल को खत्म होती है। इस यात्रा में केवल वही लोग शामिल होते हैं, जिनके भीतर कुछ करने की क्षमता हो। खास बात यह है कि 100 सदस्यों वाली इस यात्रा में आईआईटियन से लेकर निरक्षर ग्राम प्रधान तक शामिल होते हैं।
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