उत्तराखंड के विधायकों पर किसी और का रंग न चढ़े, लिहाजा विधायकों की होली इस बार घर-परिवार और समर्थकों से दूर आलीशान होटल और रिजोर्ट के बंद कमरों में होगी। होली में दिल मिल जाते हैं और दुश्मन भी गले लगते हैं, लेकिन इस होली से पहले अपने भी गले लगने को तैयार नहीं है।
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उत्तराखंड CM ने कांग्रेसी विधायकों को किया 'नजरबंद', तस्वीरें...
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कांग्रेस विधायक हरीश धामी
- फोटो : amar ujala
राज्य की राजनीति में दुश्मनी का जो चटख रंग घोला गया है, वह होली के बाद ही उतरेगा। 28 मार्च को विधानसभा के अंदर पता चलेगा कि किसकी पिचकारी में कितना और कौन-कौन से रंग हैं। होली के पहले राज्य में चल रहे राजनीतिक हुड़दंग में पाले तो खिंच गए हैं, लेकिन दोनों ओर अपनों के विश्वास का रंग फीका पड़ गया है।
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हरीश रावत ने रामनगर रिसोर्ट में अपने विधायकों को भेजा
- फोटो : amar ujala
कांग्रेस की चिंता तो समझ में आती है कि उनके नौ विधायक खुलेआम सदन के अंदर विपक्ष के साथ जा बैठे और विरोध में हाथ खड़े किए। लेकिन विपक्ष में बैठी भाजपा ने भी 18 मार्च से पहले अपने विधायकों को एक जगह जुटा लिया था। भाजपा को जितना डर उस पाले से आए विधायकों के लौट जाने का है। वहीं कहीं न कहीं अपनी गिनती भी पूरी रखने का था। राज्यपाल की परेड के बाद भाजपा विधायक भी छोड़े नहीं गए हैं उन्हें भी सुरक्षा के कवच में गुड़गांव के होटल में रहना पड़ रहा है।
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हरीश रावत ने रामनगर रिसोर्ट में अपने विधायकों को भेजा
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कांग्रेस का डर स्वाभाविक है, लिहाजा बचे विधायकों को समेट कर रामनगर पहुंचा दिया। कांग्रेस को कुमाऊं कहीं न कहीं अधिक सुरक्षित दिख रहा है। जिस समय हरीश रावत की ताजपोशी मुख्यमंत्री के लिए होनी थी उस समय गिनती गिनाने के नाम पर कुमाऊं के आधा दर्जन विधायक उनके साथ खड़े थे। रामनगर में भी उन्हीं विधायकों की निगरानी में विश्वास की गिनती पूरी रखी जा रही है। उत्तराखंड में लगातार खंडित जनादेश के बाद भी सरकारें दूसरों के विश्वास के पर तो चली हैं लेकिन 15 साल की आयु वाले इस राज्य में पहली बार विश्वास का संकट है।
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हरीश रावत ने रामनगर रिसोर्ट में अपने विधायकों को भेजा
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खंडित जनादेश पाने वाले एनडी तिवारी ने पांच साल सरकार दूसरे के विश्वास पर ही चलाई। लाख विरोध के बाद कांग्रेस विधायकों पर दूसरों का रंग नहीं चढ़ा। 2007 में भाजपा स्पष्ट बहुमत से दूर रही, लेकिन सरकार चली। नेतृत्व बदला, फिर भी दलीय विश्वास कायम रहा। राज्य की जनता के सामने भी मुकिश्ल खड़ी है। राज्य की जनता कुछ महीनों बाद अपना फैसला सुनाने जा रही थी पर होली के पहले ही राजनेताओं क चहेरों पर जो रंग चढ़ा है उससे असलियत छुप गई है।