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कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद की 140 वीं जयंती पर गांव वालों ने काटा केक, साहित्य प्रेमियों ने किया नमन

Sat, 01 Aug 2020 12:20 AM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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केक काटकर जयंती मनाते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला।
कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद की 140 जयंती पर महोत्सव तो नहीं हुआ, लेकिन लमही की लोगों ने अपने लाल को नमन किया। मुंशी जीके  स्मारक पर सादगी और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पुष्प अर्पित किया गया। वहीं ग्रामीणों ने केक काटकर जयंती मनाई तो संस्थाओं ने वर्चुअल नमन किया। 

शुक्रवार को संस्कृति विभाग की ओर से क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रभारी यशवंत सिंह राठौर, प्रो. श्रद्धानंद, दुर्गा श्रीवास्तव, सलीम राजा तथा विविध संस्थाओं के प्रतिनिधि लमही पहुंचे। पांडेयपुर चौराहा एवं लहुराबीर चौराहा पर स्थापित प्रेमचंद की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया।
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कोरोना के चलते सूना पड़ा मुंशी प्रेमचंद स्मारक। - फोटो : अमर उजाला।
आम आदमी के मन से जुड़ने वाले साहित्यकार थे प्रेमचंद 
मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर श्री अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज के हिन्दी विभाग द्वारा हमारे समय में प्रेमचंद विषयक वेबिनार हुआ। प्रबंधक अनिल कुमार जैन ने कहा कि मुंशी जी आम आदमी के मन से जुड़ने वाले साहित्यकार थे। प्राचार्या डॉ. कुमकुम मालवीय ने कहा कि मुंशी जी के उपन्यास अपने युग का दस्तावेज हैं। बीएचयू के प्रो. सदानंद शाही और डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद को समझने के लिए उनके लेख और पत्रों को भी पढना होगा। संचालन डॉ. अर्चना सिंह तथा डॉ. आरती सिंह ने किया। संयोजन प्रियंका अग्रवाल ने किया। 

हर घर में हैं बड़े भाई साहब और बूढ़ी काकी 
भारत विकास परिषद ओजस्वी शाखा की ओर से जयंती पर ऑनलाइन वेबिनार हुआ। जिसमें मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि प्रेमचंद के पात्र आज भी हमारे बीच हैं। आज के संदर्भ में घर-घर मे बड़े भाई साहब, नमक का दरोगा और बूढ़ी काकी समाज में मौजूद हैं। 
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मुंशी प्रेमचंद। फाइल - फोटो : अमर उजाला।
चित्रकला प्रतियोगिता में रामविनय प्रथम 
महापंडित राहुल सांकृत्यायन शोध एवं अध्ययन केंद्र की ओर से ऑनलाइन चित्रकला प्रतियोगिता हुई। कथा सम्राट के उपन्यास नमक के दारोगा पर आधारित प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को ई प्रमाणपत्र दिए गए। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार बीएचयू के रामविनय चौहान, द्वितीय पुरस्कार प्रसन्न पटेल और तृतीय स्थान पर श्रेया सिंह रहीं। सांत्वना पुरस्कार रितिका रॉय और दीपक को दिया गया। 

अनंत काल तक पढ़े जाने वाले लेखक हैं मुंशी जी 
बीएचयू स्थित अंबेडकर चेयर की ओर से अंतरराष्ट्रीय प्रेमचंद विमर्श आयोजित हुआ। संगोष्ठी का प्रारंभ प्रख्यात लेखक अजय मिश्रा को श्रद्धांजलि के साथ हुआ। कलाकार गोविंद नामदेव द्वारा अजय मिश्र और प्रोफ़ेसर मंजीत चतुर्वेदी की नाट्य और उपन्यास रचना तर्पण ताम-ढकोसला का विमोचन किया गया।
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मुंशी प्रेमचंद। फाइल - फोटो : अमर उजाला।
डिजिटल मंच पर कहानियों का मंचन
कामायनी वाराणसी की ओर से जयंती पर कलाकारों ने डिजिटल मंच पर मुंशी जी को श्रद्धांजलि दी। कलाकारों ने प्रेमचंद की साहित्यिक रचनाओं को कहानीकार बनकर अभिनय के रूप में प्रस्तुत किया। कलाकार उमेश भाटिया ने बड़े भाई साहब का मंचन किया। कार्यक्रम में संस्था के निर्देशक डॉ.दीपक कुमार, वीना सहाय, इला पांडेय, श्रवन्ति मुखर्जी, साकेत चटर्जी, प्रमोद प्रमिल, अमन श्रीवास्तव, अमलेश श्रीवास्तव आदि कलाकारों ने परफॉरमेंस की और विचार रखे।
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