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परिवार आत्महत्या केस: ‘चोट रूह की है, इसलिए दर्द जरा गहरा है...’ सुसाइड नोट में पत्नी ने लिखा और...

Sat, 15 Feb 2020 10:03 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
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Family Suicide case - फोटो : अमर उजाला
‘अधूरी कहानी पर खामोश लबों का पहरा है... चोट रूह की है इसलिए दर्द जरा गहरा है...।’ यह पंक्तियां पंखा कारोबारी चेतन तुलस्यान के कमरे से बरामद सुसाइड नोट की शुरुआत में उसकी पत्नी ऋतु ने लिखी थीं। चेतन के अनुसार, आंखों से कम दिखाई देने के कारण उसने सुसाइड नोट ऋतु से लिखवाया था। फोरेंसिक टीम के अनुसार, सुसाइड नोट इत्मीनान से और अलग-अलग दिनों में पेन और स्केच से लिखा गया है।
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मौके पर जमा भीड़ - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के मुकीमगंज क्षेत्र के नचनीकुआं मुहल्ला निवासी कारोबारी चेतन तुलस्यान बीते एक महीने से पत्नी और बच्चों के साथ जान देने की तैयारी कर रहे थे। इसके लिए घर में नायलान की रस्सी और टेप लाकर रखे थे। पहले पत्नी और फिर दोनों बच्चों को मानसिक रूप से तैयार किए। उसके बाद बीती 22 जनवरी को चेतन ने स्टैंप युक्त शपथ पत्र बनवाकर उसका लेमिनेशन कराया। 
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varansi Family suicide case - फोटो : अमर उजाला
शपथ पत्र और सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा है कि उनकी मौत के बाद उनके हिस्से की संपत्ति गोरखपुर स्थित ससुराल के श्रीराम खेमका को दे दी जाए। श्रीराम खराब समय में भी लगातार आर्थिक मदद करते रहे। उनकी बीमारी के कारण उनके बच्चों ने बहुत दुख झेला है। पिता ने पहले ही कह रखा था कि वह उनके बच्चों को कुछ नहीं देंगे।

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व्यापारी के बेटे का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
ऋतु ने लिखा कि तकरीबन 20 साल पहले शादी कर बनारस आई तो परिवार जितना खुशहाल बाहर से दिखता था, अंदर से वैसा नहीं था। बनारस में कभी भी खुश नहीं रह सकी। शादी के बाद पता लगा कि पति आंखों की कम होती रोशनी की लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं। पति की बीमारी बढ़ने के साथ ही घर में उनकी स्थिति कमजोर होती चली गई। ससुर और देवर ने उन्हें पंखे के व्यापार से हटाकर पांच हजार रुपये का कर्मचारी बना दिया। पता था कि सब गलत हो रहा है लेकिन कभी कुछ कह नहीं पाती थी।
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व्यापारी की बेटी का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सास और ससुर ने कभी हमारी समस्याएं समझने की कोशिश नहीं की। ससुराल में हमेशा सौतेला व्यवहार हुआ और चेतन की बीमारी के प्रति उनके मां-बाप कभी गंभीर नहीं दिखे। मायके वाले ही शुरू से मदद करते आए। कई बार अवसाद ग्रस्त होने पर लगा कि सास गले लगाकर बेटी के जैसे प्यार करेंगी और समझाएंगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। 
 
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varansi Family suicide case - फोटो : अमर उजाला
ससुराल में हर तरफ से असहयोग और उपेक्षा ही मिली। कई बार इच्छा हुई कि चेतन को छोड़कर बच्चों के साथ चली जाऊं, लेकिन ऐसा कर नहीं सकी। मकान को लेकर चेतन को जबसे उनके पिता थाने ले गए, तबसे वह अपने आपको कमरे में बंद करके रखते थे। एक कमरे में हम दोनों का हमेशा रहना अच्छा नहीं लगता था। तमाम तरह की तकलीफों, परेशानियों और दुख की वजह से प्यारे बच्चों और पति के साथ दुनिया छोड़ने का निर्णय ले रही हूं।
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