वाराणसी में मंगलवार की शाम निर्माणाधीन फ्लाईओवर हादसे में 18 लोगों की जान चली गई और करीब दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों का शहर के विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। हादसे के कारणों की जांच शुरू हो गई है। हादसे के कारण के कुछ प्रमुख पहलू सामने आए हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें..
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- फोटो : अमर उजाला
हादसों से निपटने के लिए प्रशासन का कंटीजेंसी प्लान होता है। प्रशासन समय समय पर मॉक ड्रिल भी करता है। मगर बनारस का दुर्भाग्य कि यहां कोई कार्ययोजना नहीं थी। विशालकाय बीम के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए ना तो समय से जेसीबी पहुंची, न अधिकारी और न ही स्वास्थ्य विभाग की टीम। हृदय विदारक घटना के बाद जब अधिकारी मौके पर पहुंचे भी तो जेसीबी के अलावा किसी तरह का संसाधन नहीं होने से राहत कार्य कामचलाऊ ढंग से ही शुरू हुए। आम लोगों ने ही पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली।
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वाराणसी के चौकाघाट फ्लाईओवर हादसा लापरवाही और प्रशासनिक चूक के कारण हुआ है। इसका निर्माण शुरू होने से ही यहां लगातार सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती रही है। सेतु निगम की निगरानी में इसका निर्माण सितंबर, 2015 से शुरू कराया गया है। 2019 मार्च में इसे पूरा करना था लेकिन वाहनों के दबाव का हवाला देकर काम को अक्तूबर, 2019 में पूरा करने की मियाद बढ़ाई गई थी।
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कई बार प्रशासन को चेताया गया कि रूट डायवर्जन करके यहां निर्माण कराया जाए नहीं तो हादसा हो सकता है। हर समय इस मार्ग पर आवाजाही के बावजूद फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान न तो रूट डायवर्ट किया गया और न ही सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया। ताक पर सुरक्षा मानकों को रखकर हो रहे निर्माण में तकनीकी दिक्कत के चलते हादसा हुआ है।
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जानकारों की मानें तो जहां इस तरह का निर्माण होता है, उस पूरे इलाके को सील कर दिया जाता है। निर्माण कार्य से चार चार फीट दाएं-बाएं बैरिकेडिंग की जाती है। आवागमन को सीमित कर दिया जाता है। वहां लाल झंडे, लाल लाइट लगाई जाती हैं। यहां ऐसा सुरक्षा मानक नहीं थे। यही नहीं, जहां वाहनों का दबाव अधिक होता है, वहां रात में काम कराया जाता है। नियमानुसार दिन में काम वहीं कराना चाहिए, जहां जगह मिलती हो और किसी की जान के लिए खतरा न हो।
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कैंट रेलवे स्टेशन के समीप निर्माणाधीन फ्लाईओवर की दो बीम मंगलवार की शाम साढ़े पांच बजे सड़क पर गिर पड़ीं। बीम के नीचे सिटी बस सहित एक दर्जन वाहन दब गए। हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए। घायलों का बीएचयू के ट्ऱॉमा सेंटर सहित शहर के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। हादसे की जानकारी मिलने पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और सीएम योगी वाराणसी पहुंचे।
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निर्माणाधीन फ्लाईओवर का बीम गिरने से हुए हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच टीम गठित कर दी है। इसमे कृषि उत्पादन आयुक्त राजप्रताप सिहं की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय गठित की है। इसमें सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता भूपेन्द्र शर्मा और जल निगम के एमडी राजेश मित्तल को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी आदेश में 48 घंटे से पहले विस्तृत आख्या मांगी है। जांच टीम के सदस्य देर रात वाराणसी पहुंच गए।
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फ्लाईओवर के दो बीम गिरने से हुआ हादसा बनारस के इंजीनियरिंग पर काला धब्बा बन गया है। इंजीनियरिंग से जुड़े जानकारों का मानना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और पिलर पर रखे बीम का संतुलन बिगड़ने के कारण दुर्घटना हुई है। हालांकि जिस पिलर पर बीम रखे हुए थे, वह पुरानी स्थिति में हैं। सेतु निगम के रिटायर्ड इंजीनियर आरके सिंह और पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड इंजीनियर केएम श्रीवास्तव का इंजीनियरिंग में पहला अध्याय सिखाया जाता है कि काम वाली साइट पर खून की एक बूंद नहीं गिरनी चाहिए। हादसा इंजीनियरिंग की तकनीक पर सवाल खड़े करता है।
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निर्माणाधीन फ्लाईओवर के दो बीम गिरने से नीचे दबी गाड़ियों में लोग घंटों कराहते रहे। मौके पर मौजूद लोग उनकी मदद करना चाह रहे थे, पानी पिला रहे थे लेकिन हजारों क्विंटल वजनी बीम पर किसी का वश नहीं चल रहा था। इस दौरान घायलों की जिंदगी से जद्दोजहद जारी रही और चिकित्सकीय मदद न मिलने के कारण तड़पते हुए सांस टूट गई। मौजूद लोग घायलों का तड़प कर मरना देख चीख रहे थे और पुलिस-प्रशासन को कोस रहे थे लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे थे।
फ्लाईओवर के दो बीम गिरने से हुई मौतों की कसूरवार पुलिस भी है। निर्माण कार्य के दौरान राहगीरों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता न बरतने, ट्रैफिक वालंटियर्स को तैनात न करने और अराजकतापूर्ण तरीके से कार्य करने के आरोप में 19 फरवरी को सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक के खिलाफ सिगरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमा दर्ज करने के बाद सिगरा पुलिस ने कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया। वहीं, सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक ने मुकदमे को हल्के ढंग से लेते हुए लापरवाह तरीके से निर्माण कार्य जारी रखा।