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ट्रेजडी किंग का निधन: फिल्म संघर्ष की शूटिंग के लिए बनारस आए थे दिलीप कुमार, आजमगढ़ की ब्लैक पाटरी से भी रहा प्यार

Wed, 07 Jul 2021 10:59 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

 ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार की फिल्म संघर्ष की शूटिंग 1966-67 में हुई थी। वर्ष 1968 में रिलीज हुई फिल्म संघर्ष सुपर डुपर हिट रही। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित बंगाली लेखिका महाश्वेता देवी की शार्ट स्टोरी पर आधारित इस फिल्म की शूटिंग वाराणसी के कई इलाकों में हुई थी। 
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dilip kumar - फोटो : फाइल फोटो
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार ने बुधवार को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्होंने अंतिम सांस तो मुंबई में ली, लेकिन शोक का अक्स वाराणसी से लेकर आजमगढ़ के रंगमंच के कलाकारों में महसूस हुआ। बुधवार सुबह जब दिलीप कुमार के निधन की खबर के बाद मोक्ष नगरी काशी में उनको श्रद्धांजलि दी गई। डर्बीशायर क्लब के लोगों ने उनके चित्र पर गुलाब की पंखुड़ी और मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी। लोगों ने जब तक सूरज चांद रहेगा दिलीप साहब का नाम रहेगा आदि का नारा लगाकर उनको याद किया। 

ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार की फिल्म संघर्ष की शूटिंग 1966-67 में हुई थी। वर्ष 1968 में रिलीज हुई फिल्म संघर्ष सुपर डुपर हिट रही। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित बंगाली लेखिका महाश्वेता देवी की शार्ट स्टोरी पर आधारित इस फिल्म की शूटिंग वाराणसी के कई इलाकों में हुई थी। पुराने लोगों के अनुसार ये फिल्म बनारस के निशात टॉकिज में लगी थी, जो तब गोदौलिया चौराहे के पास (वर्तमान में मल्टी लेवल पार्किंग के बगल में) स्थित था।  दिलीप कुमार को आजमगढ़ जिले की ब्लैक पाटरी कला से बहुत प्रेम था। पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रजीत यादव से वह यहां की कलाकृतियों को मंगाया करते थे।
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दिलीप कुमार - फोटो : Social Media
दिलीप कुमार के जाने का गम उनके चाहने वालों को सबसे ज्यादा है। दालमंडी के ताज होटल में भी सन्नाटा पसरा है। दिलीप साहब के इंतकाल के गम में बंदी रखी गई है। इस गमजदा मौके पर कुरआन ख्वानी भी हुई और दिलीप साहब की मगफिरत की दुआ भी की गई।
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दिलीप कुमार - फोटो : social media
दालमंडी के ताज होटल के मालिक मो. मुख्तार बताते हैं कि फिल्म संघर्ष की शूटिंग वाराणसी में सन 1966-67 में हुई थी। इस दौरान दिलीप कुमार का भी बनारस आना जाना हुआ। शूटिंग के दौरान यूनिट के लिए खाने की व्यवस्था दिलीप कुमार के फैन दालमंडी के मोहम्मद ताज को मिली। 

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ताज होटल - फोटो : अमर उजाला
कहते हैं कि ताज मियां का खाना खाकर दिलीप कुमार इतने खुश हुए थे कि तीनों समय का खाना उन्होंने ताज मियां को भेजने का आदेश दे दिया था। कहते हैं कि इसी फिल्म के बाद दालमंडी का मशहूर ताज होटल भी नॉनवेज भोजन के मामले में बेहद मशहूर हो गया। 
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dilip kumar
दिलीप कुमार शूटिंग के दौरान एक-दो बार खुद भी ताज होटल आए थे। वहीं बाद में दिलीप साहब से मुलाकात करने कई बार ताज मियां मुंबई भी गए और तब दिलीप कुमार ने बड़े सम्मान से उनकी खातिरदारी भी की थी।
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dilip kumar
अभिनेता दिलीप कुमार का आजमगढ़ जिले से काफी लगाव रहा। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे निज़ामाबाद के ब्लैक पटरी के दीवाने थे। जिले से मुम्बई जाने वालों से वे फ्लावर पॉट व अन्य कलाकृति मांगते थे। उनके निधन से जिले के ब्लैक पाटरी कलाकारों में भी शोक की लहर दौड़ गई है। 
 
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dilip kumar
नेहरू बाल संघ का राष्ट्रीय सांस्कृतिक अधिवेशन वर्ष 2002 में मुंबई में हुआ था। जिसमें पूर्व मंत्री चंद्रजीत यादव भी आमंत्रित थे। इसकी जानकारी होने पर दिलीप कुमार ने उनसे निजामाबाद की ब्लैक पाटरी से बने फ्लावर पॉट लाने को कहा था। जब यह बात कलाकारों को पता चली कि दिलीप कुमार उनकी कला के बहुत बड़े कद्रदान हैं तो उत्साहित कलाकारों ने उन्हें फ्लावर पॉट भेंट किया और उनके संग एक सप्ताह भी मुंबई में बिताया। 
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