मैराथन प्रतियोगिता में दौड़ते सभाजीत यादव
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सभाजीत यादव की पहचान इलाके में मैराथन धावक के रूप में है। दिल्ली, मुंबई, बैंगलुरु सहित कई शहरों में वह हाफ व फुल मैराथन में पदक जीत चुके हैं। 60 की उम्र में भी खेलों के प्रति उनका जोश कम नहीं हुआ है।
आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाली मैराथन में हिस्सा लेने को वह तत्पर रहते हैं। बताते हैं कि उनका सपना था कि वह देश के लिए खेलें और मेडल जीतें। पर गरीबी के चलते वह पांचवीं से आगे नहीं पढ़ सके और फिर पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण सपना भी छोड़ना पड़ा।
गांव में खेत में बेटों को देनी शुरू की ट्रेनिंग
वह पूरी तरह से खेती-किसानी में जुट गए, लेकिन देश के लिए मेडल जीतने की तमन्ना मन में बनी रही। इसके लिए उन्होंने अपने बेटों को तराशना शुरू किया। गांव में सुविधाएं सीमित थीं और शहर तक भेजने के लिए पैसे नहीं थे।
लिहाजा खेतों में ही तीन बेटों रोहन, रोहित और संतोष को एथलेटिक्स की ट्रेनिंग देनी शुरू की। वह खुद धावक थे, लेकिन संभावनाओं को देखते हुए बच्चों को जेवलिंग से जोड़ा। पिता की लगन, मेहनत को सार्थक करने में बच्चों ने भी कसर नहीं छोड़ी।