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महावीर फोगाट की छोरियों की तरह जौनपुर के सभाजीत की लगन व मेहनत को सार्थक कर रहे उनके छोरे

Thu, 12 Dec 2019 07:55 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी विभाष यादव, अमर उजाला, जौनपुर
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जेवलिंग थ्रो चैंपियन रोहित यादव पिता सभाजीत यादव के साथ - फोटो : a

जौनपुर के अदारी डभिया गांव निवासी सभाजीत यादव की हकीकत भी हरियाणा के भिवानी जिले के बलाली गांव निवासी महावीर फोगाट सरीखी ही है। महावीर फोगाट की आज दुनिया के हर कोने में गूंज है, तो इसलिए क्योंकि आमिर खान जैसे बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार ने दंगल फिल्म में सिनेमाई पर्दे पर उनके किरदार निभाया।

मैराथन धावक सभाजीत भी 40 साल पहले पारिवारिक जिम्मेदारियों और अभावों के कारण देश के लिए मेडल जीतने का सपना पूरा नहीं कर सके, तो बेटों को ट्रेनिंग देकर इस काबिल बनाया। पिता की शुरुआती ट्रेनिंग के बूते ही एक बेटा स्कूल गेम की विश्व चैंपियनशिप की जेवलिंग थ्रो स्पर्धा में स्वर्णिम सफलता हासिल करने में कामयाब रहा और अब वह अंडर-20 की विश्व चैंपियनशिप में देश के लिए मेडल जीतने के लिए साऊथ अफ्रीका में ट्रेनिंग ले रहा है। दो अन्य बेटे भी उसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

 

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मैराथन प्रतियोगिता में दौड़ते सभाजीत यादव - फोटो : ं

सभाजीत यादव की पहचान इलाके में मैराथन धावक के रूप में है। दिल्ली, मुंबई, बैंगलुरु सहित कई शहरों में वह हाफ व फुल मैराथन में पदक जीत चुके हैं। 60 की उम्र में भी खेलों के प्रति उनका जोश कम नहीं हुआ है।

आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाली मैराथन में हिस्सा लेने को वह तत्पर रहते हैं। बताते हैं कि उनका सपना था कि वह देश के लिए खेलें और मेडल जीतें। पर गरीबी के चलते वह पांचवीं से आगे नहीं पढ़ सके और फिर पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण सपना भी छोड़ना पड़ा।

गांव में खेत में बेटों को देनी शुरू की ट्रेनिंग

वह पूरी तरह से खेती-किसानी में जुट गए, लेकिन देश के लिए मेडल जीतने की तमन्ना मन में बनी रही। इसके लिए उन्होंने अपने बेटों को तराशना शुरू किया। गांव में सुविधाएं सीमित थीं और शहर तक भेजने के लिए पैसे नहीं थे।

लिहाजा खेतों में ही तीन बेटों रोहन, रोहित और संतोष को एथलेटिक्स की ट्रेनिंग देनी शुरू की। वह खुद धावक थे, लेकिन संभावनाओं को देखते हुए बच्चों को जेवलिंग से जोड़ा। पिता की लगन, मेहनत को सार्थक करने में बच्चों ने भी कसर नहीं छोड़ी।

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साउथ अफ्रीका में प्रैक्टिस करते रोहित यादव

रोहित दक्षिण अफ्रीका में कर रहा ट्रेनिंग

मझले बेटे रोहित ने जब जिला, मंडल, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के बाद स्कूली गेम की विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता तो अचानक से लोगों की उसकी ओर नजर गई। खेल दिवस पर उन्हें प्रदेश सरकार ने सम्मानित भी किया।

प्रतिभा को परखते हुए स्पोर्टस अथाॅरिटी ऑफ इंडिया ने उसे विशेष ट्रेनिंग के लिए साऊथ अफ्रीका भेजा है, जहां वह जर्मन कोच क्लाफस बर्टोनिज और सीनियर खिलाड़ी नीरज चोपड़ा के साथ कड़ा अभ्यास कर जुलाई में होने वाली अंडर-20 की विश्व चैंपियनशिप की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

सभाजीत के बड़े पुत्र रोहन भी जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में कई मेडल जीत चुके हैं, मगर कंधे की चोट से उनका अभियान थोड़ा सुस्त पड़ गया। छोटा बेटा संतोष भी पिता की देखरेख में निरंतर अभ्यास कर अपनी प्रतिभा को निखारने में जुटा है।
 

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चैंपियन बेटे रोहित के साथ सभाजीत

मुश्किलें झेली पर हार नहीं मानी

ग्रामीण क्षेत्रों में कहावत प्रचलित है कि खेलोगे-कूदोगे होगे खराब और पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब...। सभाजीत के सामने ऐसे ही मुश्किल थी। खुद का बचपन और जवानी अभावों में बिताने के बाद वह बच्चों को काबिल बनाने के लिए उनकी अच्छी शिक्षा-दीक्षा का रास्ता चुन सकते थे, लेकिन देश के लिए मेडल जीतने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने सारी चुनौतियों को दरकिनार कर बेटों को खेल में आगे बढ़ाने का फैसला लिया। शुरुआत में गांव-परिवार में विरोध भी हुआ, लेकिन वह डिगे नहीं। 
 

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सभाजीत के तीनों बेटे

इसलिए चुना जेवलिंग

सभाजीत ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। खेती भी बहुत बड़ी नहीं है। बस इसलिए उन्होंने बच्चों के लिए जेवलिंग को चुना। अन्य खेलों के सापेक्ष जेवलिंग में कम संसाधनों की जरुरत होती है। खाली खेतों में भी वह इसकी ट्रेनिंग करा सकते हैं। इसके खिलाड़ी को बहुत अच्छी डायट की भी जरुरत नहीं होती। 

 

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सभाजीत यादव

पिता की प्रेरणा से आगे बढ़ रहे रोहित, मेडल जीतने का भरोसा

दक्षिण अफ्रीका में ट्रेनिंग कर रहे रोहित ने फोन पर अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उनके खेलों की प्रेरणा के पीछे पूरी तरह पिता की मेहनत और लगन ही कारण है। पिता ने काफी मुश्किलें झेलकर और कठिन परिश्रम कर उन्हें तराशा है।

उनका सपना पूरा करने के लिए वह जीजान लगा देंगे। फिलहाल पूरा फोकस जुलाई से केन्या में होने वाली अंडर-20 की विश्व चैंपियनशिप के लिए है। रोजाना 5-6 घंटे का अभ्यास चल रहा है। इसके बाद वह अन्य स्पर्धाओं में भी जुटेंगे।
 

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बेटे रोहित के साथ सभाजीत

रोहित के नाम यह हैं ये उपलब्धियां

  • जुलाई 2016 में तुर्की में हुए विश्व स्कूल गेम में चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर सुर्खियों में आया।
  • नवंबर 2019 को आंध्र प्रदेश के गुन्टुर शहर में राष्ट्री़य जूनियर प्रतियोगिता में 78.68 मीटर भाला फेंक कर स्वर्ण पदक
  • 27 से 30 अगस्त 2019 को लखनऊ की प्रतियोगिता में 78.98 मीटर भाला फेंक कर स्वर्ण पदक।
  • अंडर 20 अंर्तराष्ट्रीय एथलेटिक्स थ्रोविंग मीट में 74.44 मीटर में स्वर्ण पदक।
  • जुलाई 2019 में कजाकिस्तान के अलमाटी शहर में अंर्तराष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक। -अप्रैल 2019 में हरियाणा के सोनीपत में सेकेण्ड जेवलिंग थ्रो ओपेन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
  • जुलाई 2018 में केरल में आयोजित यूथ नेशनल गेम में रिकार्ड कायम।
  • हैदराबाद में 2017 में नेशनल यूथ गेम में 76.11 मीटर भाला फेंककर रिकॉर्ड बनाया।
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