महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में एक व दो दिसंबर को होने वाले पर्यावरण कुंभ के मद्देनजर तैयारियां जोर शोर से हो रही हैं। इसी क्रम में विद्यापीठ परिसर की दीवारों को भी संवारा जा रहा है। दीवारों पर की जा रही वॉल पेंटिंग भी पर्यावरण प्रदूषण का दर्द बयां कर रही है और संरक्षण की राह भी सुझा रही है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : amar ujala
ललित कला विभाग के छात्र-छात्राओं ने श्रीमद्भागवत गीता में उल्लेखित पर्यावरण से संबंधित संदर्भों को बड़ी खूबसूरती से उकेरा है। कालिया मर्दन के जरिये यमुना नदी के प्रदूषण के प्रति सचेत किया गया है तो समुद्र मंथन के दृश्य उकेर कर प्राप्त चौदह रत्न भी चित्रित किए गए हैं।
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इसी तरह वट पूजा के दृश्यों के जरिये कलाकारों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है। काशी विद्यापीठ गंगापुर परिसर के ललित कला विभाग के विद्यार्थी इस काम में पूरी तन्मयता के जुटे हैं। डॉ. शशिकांत नाग व सुमित घोष के निर्देशन में छात्र ये कार्य कर रहे हैं।
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वॉल पेंटिंग में काशी विद्यापीठ से जुड़े रहे महात्मा गांधी और उनकी शिक्षा, स्वच्छता के संदेशों के अलावा लाल बहादुर शास्त्री के जीवनी को भी चित्रों में उकेरा जा रहा है। पर्यावरण कुंभ के प्रदर्शनी संयोजक डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि पांच श्रेष्ठ वॉल पेंटिंग को पुरस्कृत किया जाएगा।
काशी विद्यापीठ में होने वाले पर्यावरण कुंभ के लिए 28 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय कलाकार पर्यावरण पर पेंटिंग बनाकर समर्पित करेंगे। इसके लिए लिथुआनिया के अंतानस आपकार्शस, औस्रा जूकै स्कीनी, क्रिस्टिना सिविलाइट, जिंटेरे सिऔलिनी समेत भारत के भी कई जाने माने कलाकार आ रहे हैं। विद्यापीठ परिसर में बालू से समुद्र मंथन का दृश्य भी बनाया जा रहा है। इस सैंड आर्ट में समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों को भी दर्शाया जाएगा।