काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पहली बार आयोजित राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव अपनी कई यादें और मुलाकातें देकर अलविदा कह गया। शनिवार को आठ दिवसीय राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का आखिरी दिन था। आगे की स्लाइड्स में देखें क्या क्या हुआ महोत्सव में....
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संस्कृति महोत्सव में शास्त्रीय गायन और वादन की भी मिठास घुली
- फोटो : अमर उजाला
काशी और आसपास के लोगों को ये संस्कृति और कला का महोत्सव वो सब कुछ दे गया जिसके शायद वो शायद अंजान थे। चाहे वो बहुरुपिया के रूप में आए राजस्थान के बहुरुपिये रहे हों या विविध लोक नृत्य और संगीत लेकर आए देश भर के लोक कलाकार।
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संस्कृति महोत्सव का हुआ समापन
- फोटो : अमर उजाला
विविध लोक चित्रों के रंगों के साथ ही इस महोत्सव में नामी हस्तियों ने भी अपनी शिरकत से इसे यादगार तो बना ही दिया।इस महोत्सव की साक्षी बनकर काशी खुद पर तो इतराई ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय का भी मान बढ़ गया।
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प्रधानमंत्री मोदी की शिरकत ने महोत्सव के अध्याय में एक नई कड़ी जोड़ी
- फोटो : अमर उजाला
देश भर के अलग अलग राज्यों ग्रामीण परिवेश, आदिवासी इलाकों से आए लोक कलाकारों ने इस महोत्सव को विविध लोक रंगों से चटख किया। इस महोत्सव की साक्षी बनकर काशी खुद पर तो इतराई ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय का भी मान बढ़ गया।
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प्रधानमंत्री मोदी की शिरकत ने महोत्सव के अध्याय में एक नई कड़ी जोड़ी
- फोटो : अमर उजाला
झारखंड, बिहार, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, असम, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृतियों का मिलन हुआ। झारखंड के कलाकारों ने पाइका नृत्य और त्रिपुरा के होजागिरी नृत्य ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
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कथक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति
- फोटो : अमर उजाला
कथक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति हुई। ...डिमिक डिमिक डम डम डमरू बाजे, प्रेम मगन नाचे भोला गीत पर उनकी प्रस्तुति हर किसी के लिए यादगार बनी। महामना की तपोभूमि भारतीय कला-संस्कृति की अपार संपदा की वो खान बन गई है, जहां से हर कोई अपने मन का मोती चुनने के लिए आतुर हो उठा है।
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मुखौटा प्रदर्शनी
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राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव में मुखौटों के इतिहास से परिचय कराती शीर्ष प्रतिशीर्ष प्रदर्शनी ने भी हमें उस कला से परिचित कराया जिसे कि शायद हम भूल ही चुके थे।
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कठपुतली की प्रदर्शनी
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कठपुतली की प्रदर्शनी ने इस महोत्सव को और खास बनाया। इसने भी तो स्मार्ट फोन और टैबलेट की दुनिया से निकालकर बच्चों को एक नया सुखद अनुभव कराया और तो और बड़ों को अपनी पुरानी यादों, बचपन के गलियारे में ले गए।
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देशभर से आए कलाकारों ने लोगों का मन मोहा
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देश भर के अलग अलग राज्यों ग्रामीण परिवेश, आदिवासी इलाकों से आए लोक कलाकारों ने इस महोत्सव को विविध लोक रंगों से चटख किया। चाहे वो बहुरुपिया के रूप में आए राजस्थान के बहुरुपिये रहे हों या विविध लोक नृत्य और संगीत लेकर आए देश भर के लोक कलाकार।
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मृदुल के सुरों से महकी संस्कृति महोत्सव की शाम
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राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव की दूसरी निशा को भोजपुरी गायक, अभिनेता और सांसद मनोज तिवारी मृदुल की मौजूदगी ने मस्ती और उल्लास से भर दिया। विविध रंगों से सजे इस महोत्सव में मनोज ने भोजपुरी की मिठास भरी। ‘जिया हो बिहार का लाला’ सुनाया तो तालियों की गूंज के बीच हाल मेें बैठे युवा थिरक उठे।
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देशभर से आए कलाकारों ने लोगों का मन मोहा
- फोटो : अमर उजाला
देश भर से हर क्षेत्र के आए कलाकारों को काशी में प्रोत्साहन मिला। कलाकारों ने अपनी छाप छोड़ी। अपनी कला से उन्होंने संस्कृति महोत्सव में चार चांद लगा दिया।
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विविध लोक नृत्य
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देश भर के अलग अलग राज्यों ग्रामीण परिवेश, आदिवासी इलाकों से आए लोक कलाकारों ने इस महोत्सव को विविध लोक रंगों से चटख किया। काशी और आसपास के लोगों को ये संस्कृति और कला का महोत्सव वो सब कुछ दे गया जिसके शायद वो शायद अंजान थे।
मनोज तिवारी, मालिनी अवस्थी, निजामी बंधु, वडाली बंधु, पंडित विश्व मोहन भट्टा ही नहीं पद्मविभूषण गिरिजा देवी जैसी शख्सियतों की प्रस्तुतियां इस तीसरे राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव की कड़ी में जुड़ीं और इन सब में खास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिरकत ने महोत्सव के अध्याय में एक नई कड़ी जोड़ दी।