कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान की रानी लक्ष्मीबाई के पराक्रम पर लिखी कविता 'खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी' सभी ने जरूर सुनी होगी। आज इसी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का जन्म दिवस है। रानी लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी जिले के भदैनी में 19 नवंबर 1835 को हुआ था। वे बचपन से ही प्रतिभा की धनी थीं। बनारस में उनकी जंयती को लेकर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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रानी लक्ष्मीबाई
- फोटो : अमर उजाला
लक्ष्मीबाई चार बरस की थीं, जब उनकी मां का देहांत हो गया। उनके पिता मोरोपंत तांबे बिठूर जिले के पेशवा के यहां काम करते थे। रानी लक्ष्मीबाई अपने बाल्यकाल में मनुबाई के नाम से जानी जाती थीं। बचपन में ही रानी लक्ष्मीबाई ने शस्त्र विद्या सीखी। वे तलवार चलाने व घुड़सवारी में पारंगत हो गई थीं।
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रानी लक्ष्मीबाई
रानी लक्ष्मीबाई मराठा शासित झांसी राज्य की रानी और 1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की वीरांगना थीं। रानी लक्ष्मीबाई ने मात्र 23 वर्ष की आयु में अंग्रेज साम्राज्य की सेना से संग्राम किया और रणक्षेत्र में वीरगति प्राप्त की किन्तु जीते जी अंग्रेजों को अपनी झांसी पर कब्जा नहीं करने दिया।
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रानी लक्ष्मीबाई
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की 182वीं जयंती की के अवसर पर जागृति फाउण्डेशन व महारानी वीरांगना जन्मस्थान स्मारक समिति के संयुक्त तत्वावधान में भदैनी स्थित उनकी जन्मस्थली पर दीप जलाकर उन्हें श्रद्धांजली दी। वक्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की कि वहां की काटी गई बिजली को तत्काल जुड़वाया जाए।
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मुख्य अतिथि शास्त्रीय गायक पद्मभूषण पंडित राजन-साजन मिश्र, विशिष्ट अतिथि साध्वी गीताम्बा तीर्थ, सनबीम शिक्षण समूह के अध्यक्ष दीपक मधोक, रामनगर इंडस्ट्रियल स्टेट के सचिव देव भट्टाचार्या ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर जयंती समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पंडित राजन-साजन मिश्र ने कहा की बड़े दुख की बात है की देश की स्वतंत्रता के लिए अपनी जान देने वाली वीरांगना की जन्मस्थली की बिजली पिछले चार दिनों से कटी है।
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से गंगापुर स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर में रानी लक्ष्मीबाई के जयंती की पूर्व संध्या पर शनिवार को गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के निदेशक डॉ. शम्भूनाथ उपाध्याय ने किया। मुख्य अतिथि विधायक सुरेन्द्र नारायण सिंह रहे।
गोष्ठी में डॉ बंदना झा ने रानी लक्ष्मीबाई के जीवनी पर प्रकाश डाला। डॉ. सुचिता त्रिपाठी ने कहा की हम सभी के लिए रानी लक्ष्मीबाई का जीवन को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने कहा वर्तमान समय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद राष्ट्रवादी सोच के साथ नारी सशक्तिकरण में अपना अतुलनीय योगदान दे रहा हैं। विशिष्ट अतिथि एडवोकेट आलोक जी ने कहा की भारतीय नारियों का देश के उत्थान में अहम भूमिका रहा है।