बनारस में मारा गया 50 हजार का इनामी रईस बनारसी उस समय चर्चा आया जब कानपुर में नवंबर 2011 में उसने अपने भाई के हत्यारे शानू ओलांगा की हत्या गुड्डू मामा और एक अन्य बदमाश के साथ मिलकर की थी। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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rais banarasi
- फोटो : amar ujala
इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद गुड्डू मामा की मदद से रईस का नाम कानपुर से बनारस तक के कुख्यात बदमाशों में शुमार हो गया। सपा के पूर्व पार्षद विजय जायसवाल के कर्मचारी के भाई की हत्या और उनके घर पर फायरिंग के मामले में गिरफ्तार गुड्डू मामा इन दिनों भदोही की जेल में है।
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रईस पुलिस की वर्दी में असलहों की तस्करी करने और लूट के लिए भी जरायम जगत में हनक करता था। रईस ने बनारस में 2007 में मलदहिया क्षेत्र में पेट्रोल पंप संचालक की हत्या कर लूटपाट की थी। पकड़ा गया तो पता लगा कि वारदात को उसने पुलिस की वर्दी पहन कर अंजाम दिया था।
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इसके बाद 2010 और 2011 में जैतपुरा, आदमपुर, भेलूपुर, चेतगंज, सिगरा, कोतवाली और कानपुर में रईस का नाम हत्या, लूट और डकैती के डेढ़ दर्जन मामलों में सामने आया। रईस कानपुर की कुख्यात डी-2 गैंग की तरह पूर्वांचल में अपना गैंग बनाना चाहता था और काफी हद तक इसमें सफल भी रहा।
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मुखबिरों से रईस नफरत करता था और इसी वजह से उसने अपने साथी दीपू वर्मा की हत्या कर दी थी। नवंबर, 2015 में रईस का नाम भाजपा पार्षद शिव सेठ की हत्या में भी सामने आया था। इन दिनों वह खालिसपुरा, लोहता, मिर्जापुर और इलाहाबाद के नैनी में रह रहा था। सपा सरकार में पूर्वांचल के एक विधायक को रईस का सरपरस्त बताया जाता था।
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रईस बनारसी
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लंगड़ा हाफिज मस्जिद के पास मौजूद लोगों और पुलिस के बीच चर्चा है कि रईस और बाइक को छोड़कर भागने वाला इनामी बदमाश दीपक वर्मा है। उसे भी गोली लगने की आशंका है। हालांकि हेलमेट लगाए होने के कारण उसे कोई पहचान नहीं सका। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि लंगड़ा हाफिज मस्जिद के चौतरफा लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।
पुलिस के अनुसार रईस बनारसी के गैंग की कमान संभालने के लिए रईस के गुर्गों में मौजूदा समय में सहारनपुर जेल में बंद संतोष शुक्ला, आबिद, फरार इनामी दीपक वर्मा और फरार लालू वर्मा के नाम प्रमुख रूप से चल रहे हैं। वहीं, बांदा जेल में निरुद्ध मुन्नू तिवारी और भदोही जेल में बंद गुड्डू मामा उसके करीबी बताए जाते हैं।