बनारस में शुक्रवार की शाम क्रॉस फायरिंग में 50 हजार का इनामी बदमाश रईस अहमद उर्फ रईस बनारसी (36) और राकेश अग्रहरि (32) मारे गए। क्रॉस फायरिंग में मारे गए रईस बनारसी और राकेश अग्रहरि कभी जिगरी दोस्त हुआ करते थे। आखिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों एक-दूसरे की जान की दुश्मन बन गए। आगे की स्लाइड्स में जानिए पूरा मामला...
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rais banarasi
- फोटो : amar ujala
रंगदारी और लूट के लिए कुख्यात रईस बनारसी अक्टूबर 2015 में जिला जेल से पेशी के लिए बरेली ले जाए जाने के दौरान शाहजहांपुर में पुलिस वैन से कूद कर फरार हो गया था। इसके बाद बनारस सहित इलाहाबाद और कानपुर में हत्या, लूट और रंगदारी के कई मामलों में रईस का नाम सामने आया।
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रईस और राकेश एक-दूसरे से लगभग ढाई सौ मीटर की दूरी पर रहते थे और कभी जिगरी दोस्त भी हुआ करते थे। सौतेली मां से संपत्ति विवाद के कारण राकेश चाची के साथ रहता था। फरारी के दौरान राकेश के पास मुंबई में रईस ठहरता था। वहीं, संपत्ति विवाद में सौतेली मां को गोली मारकर हत्या के प्रयास का आरोपी राकेश अग्रहरि बीते मार्च महीने में जेल से जमानत पर छूटा था।
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भाई की हत्या के बाद रईस का कानपुर से दशाश्वमेध के खालिसपुरा स्थित ननिहाल रहने चला आया। बनारस में रईस ने राजेश अग्रहरि, राजकुमार बिंद उर्फ गुड्डू मामा, बच्चा यादव, अवधेश, बाले पटेल, पंकज उर्फ नाटे और जावेद खां सहित अन्य के साथ अपनी गैंग बनाई। बागपत जेल में मारे गए मुन्ना बजरंगी का भी रईस करीबी रहा है।
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रंगदारी वसूलने और जमीन विवाद की पंचायत को लेकर रईस बनारसी और राकेश अग्रहरि के बीच मनमुटाव हुआ तो एक-दूसरे से दूरी बना लिए। शुक्रवार की शाम जानकारी मिली कि राकेश अपने घर के समीप ही खड़ा है तो रईस और उसका दोस्त मौके पर पहुंचे। दोनों ने फायरिंग की, जिससे दोनों की मौत हो गई।
पांच-छह राउंड फायरिंग से पतालेश्वर इलाके में दहशत का माहौल है। मुहल्ले के लोग खासे भयभीत दिखे और कोई कुछ बोलने की स्थिति में नहीं दिखा। सभी को अप्रैल, 2017 का वह मंजर याद आ गया जब राकेश ने अपनी सौतेली मां पर दो राउंड फायरिंग की थी। वारदात की जानकारी पाकर आईजी रेंज विजय सिंह मीना, एसएसपी आनंद कुलकर्णी और एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह घटनास्थल के साथ ही मंडलीय अस्पताल पहुंचे।