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काशी विश्वनाथ धाम में सीएम योगी से विशेष उपहार पाकर अभिभूत हुए पीएम मोदी, जानें इसके बारे में  

Tue, 01 Dec 2020 12:30 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पीएम को उपहार देते सीएम - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार शाम जलमार्ग से ललिता घाट पहुंचे। निर्माणाधीन श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर होते हुए पीएम बाबा दरबार गए। इसके पश्चात प्रधानमंत्री चुनार के लाल गुलाबी पत्थरों से बन रहे प्रदक्षिणा मार्ग के बीच से होते हुए मंदिर चौक बिल्डिंग पहुंचे। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीतल से निर्मित एक शंख और अंगवस्त्रम भेंट किया। यह विशेष उपहार पाकर पीएम गदगद नजर आए। 
 
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काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण कार्यों की जानकारी लेते पीएम व सीएम - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के चल रहे निर्माण पर तैयार प्रस्तुति देखी।
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काशी विश्वनाथ धाम में पीएम का अभिवादन करते राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान प्रधानमंत्री ने निर्माण कार्यों की स्थिति, गुणवत्ता, भव्यता और उपयोगिता को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चर्चा की।

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पीएम का अभिवादन करते मां अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी - फोटो : अमर उजाला
कॉरिडोर के विभिन्न निर्माण को देखते हुए प्रधानमंत्री पुन: ललिता घाट पहुंचे और क्रूज पर सवार होकर देव दीपावली के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।
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काशी विश्वनाथ धाम में पीएम और सीएम - फोटो : अमर उजाला
मंडल आयुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने चल रहे निर्माण कार्य की काफी सराहना की। उन्होंने इसकी भव्यता पर विशेष जोर दिया है। 
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विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती - फोटो : अमर उजाला
दशाश्वमेध घाट पर 21 वैदिक ब्राह्मणों ने की मां गंगा की महाआरती

कार्तिक पूर्णिमा पर मां जाह्नवी के तट पर देव दीपावली की भव्यता देखते ही बन रही थी। दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति की ओर से लगातार 30वें साल महाआरती का आयोजन किया गया। गंगा घाट को 101 किलो विदेशी और पांच सौ किलो देसी फूलों से सजाया गया था। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए महाआरती संपन्न हुई। 

सोमवार को मंगलाचरण के साथ शास्त्रोक्त विधि से पूजन के साथ मां गंगा की महाआरती शुरू की गई। पहले 51 लीटर गाय के दूध से मां गंगा का दुग्धाभिषेक हुआ। दशाश्वमेध घाट की पवित्र सीढ़ियों और मढ़ी पर 21 ब्राह्मणों द्वारा मां गंगा की महाआरती की गई। ब्राह्मणों के साथ 42 रिद्धि-सिद्धि के रूप में कन्याओं ने चंवर डुलाया। 
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