पितृपक्ष की अमावस्या पर घरों से लेकर घाट तक पितरों को नमन किया गया। तिलांजलि देकर पितरों को विदाई दी गई। गंगा के 84 घाटों पर पितृ विसर्जन के अनुष्ठान हुए तो पिशाचमोचन पर त्रिपिंडी श्राद्ध और तर्पण किया गया। यहां 16 दिनों में चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पितरों की आत्मा की शांति के लिए अनुष्ठान किए।
विज्ञापन
2 of 5
गंगातट और कुंडों पर पिंडदान करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार को सुबह से ही गंगा घाट और कुंडों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। श्रद्धा भाव से गंगा स्नान करने के बाद मुंडन कराकर लोगों ने तर्पण और पिंडदान किया। दोपहर बाद तक यह सिलसिला अनवरत चलता रहा। दोपहर में घाट और कुंडों पर सबसे अधिक भीड़ का दबाव रहा।
विज्ञापन
3 of 5
गंगातट और कुंडों पर पिंडदान के लिए उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
घाटों पर पड़ी सिल्ट, कीचड़ और गंदगी ने भी श्रद्धालुओं की परीक्षा ली। पितृपक्ष की अमावस्या होने के कारण गंगा के सभी 84 घाटों, शहर के कुंड, तालाब और पिशाचमोचन कुंड पर तर्पण करने वालों की भीड़ रही।
4 of 5
गंगातट और कुंडों पर पिंडदान के लिए उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
पिशाचमोचन कुंड पर दोपहर बाद तक त्रिपिंडी, श्राद्ध और श्राद्ध तर्पण करने वालों की संख्या 40 हजार से ज्यादा थी। कुंड पर तो मेले जैसे नजारा था। घरों में लोगों ने पुरखों के लिए पकवान भी बनाए। शहर से लेकर गांव तक पितृ विसर्जन पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान घरों में भी हुए।
पिशाचमोचन कुंड पर कूड़े का अंबार
- फोटो : अमर उजाला
पितरों को तिलांजलि देकर शाम को उनके नाम से दीप भी जलाए गए। मिर्जामुराद के गौरगांव के बंगलाचट्टी स्थित प्राचीन शिव मंदिर के तालाब पर प्रतापपुर, चक्रपानपुर, लालपुर, बेनीपुर आदि गांवों में जलाशयों और शिवालयों के किनारे पितरों का तर्पण किया गया।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का हुआ श्राद्ध
विवेकानंद प्रवास स्थल संरक्षण समिति के अधिवक्ताओं ने मानमंदिर घाट पर गंगा के बीच नाव पर भूले बिसरे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का श्राद्ध किया गया। ब्रिटिश काउंसलर अभिमन्यु सिंह ने भी बांके चमार, तिलक मांझी, नीरा आर्य, गंगू मेहतर, वीरा पासी का श्राद्ध तर्पण किया। विनोद भैयाजी के संयोजन में प्रभु नारायण पांडेय, राजेश मिश्र, उदयनाथ शर्मा, दीपक राय कान्हा ने सहयोग किया।