ऐसा आपने कई बार सुना होगा कि डॉक्टर्स भगवान का दूसरा रूप होते हैं। लेकिन कई बार उनसे हुई लापरवाही मरीजों की जान पर बन आती ही। वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में 15 दिन के अंदर दूसरी बार ऐसी ही घटना घटी है। यहां बीते दिन एक 16 साल की बच्चे की मौत इसलिए हो गयी क्योंकि वक्त रहते उसे भर्ती नहीं किया गया।
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इमरजेेंसी में पहुंचे परिजनों का आरोप, एंबुलेंस में तड़पता रहा बच्चा,
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ऐसा आपने कई बार सुना होगा कि डॉक्टर्स भगवान का दूसरा रूप होते हैं। लेकिन कई बार उनसे हुई लापरवाही मरीजों की जान पर बन आती ही। वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में 15 दिन के अंदर दूसरी बार ऐसी ही घटना घटी है। यहां बीते दिन एक 16 साल की बच्चे की मौत इसलिए हो गयी क्योंकि वक्त रहते उसे भर्ती नहीं किया गया। बीएचयू अस्पताल के बाल रोग विभाग में बृहस्पतिवार को एक बार फिर लापरवाही देखने को मिली। बीते दिन शाम करीब चार बजे 16 दिन के एक बच्चे को एंबुलेंस से लेकर पहुंचे परिजनों ने आरोप लगाया कि पर्चा जमा करने के बाद भी डॉक्टर ने डेढ़ घंटे तक बच्चे को ना ही भर्ती किया और ना ही कोई देखने पहुंचा।
काफी मिन्नत के बाद चेक करने आए डॉक्टर ने एंबुलेंस में इलाज शुरू किया, उसी दौरान बच्चे की मौत हो गई। इससे पहले पिछले सप्ताह रविवार को दस दिन के बच्चे के इलाज में लापरवाही की बात आई थी और उसकी जांच अभी चल ही रही है। बच्चे के परिजनों ने बताया कि बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी पर पहुंचे तो बताया गया कि इलाज इमरजेंसी में प्रथम तल पर बाल रोग विभाग में होगा। पिता आलोक श्रीवास्तव बाल रोग विभाग में गए और वहां तैनात डॉक्टर को बच्चे के एंबुलेंस में होने और सांस लेने में तकलीफ होने की जानकारी देने के बाद तत्काल इलाज शुरू करने की मिन्नतें कीं।
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बाल रोग विभाग में पर्चा तो जमा कर लिया लेकिन नहीं कर सके भर्ती का फैसला
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ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बीएचयू अस्पताल का कटा पर्चा जमा तो कर लिया लेकिन बच्चे को वार्ड में भर्ती के लिए ले आने के बारे में पूछे जाने पर वेंटीलेंटर वाले बेड के बारे में जानकारी करने के बाद बताने की बात कही। इस दौरान डेढ़ घंटे तक बच्चा इलाज के अभाव में एंबुलेंस में तड़पता रहा। डेढ़ घंटे बाद किसी तरह डॉक्टर एंबुलेंस तक आए और बच्चे को देखना शुरू किया, उस समय उसकी धड़कन तेज चल रही थी। इलाज के दौरान एंबुलेंस में ही उसकी मौत हो गई।
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बच्चे के पिता ने बताया कि एक निजी अस्पताल से रेफर होने के बाद बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी में बच्चे को लेकर पहुंचे थे। क्रिटिकल केयर एंबुलेंस में बच्चा जिंदगी और मौत की जंग लड़ता रहा। डॉक्टरों से कई बार कहने के बाद भी बच्चे का इलाज समय से नहीं शुरू हो सका। मेरे लाल की एंबुलेंस में ही तड़प कर मौत हो गई। वह बार-बार यहीं कहते रहे कि अगर समय से बेटे को भर्ती करने का फैसला डॉक्टर ले लिए होते तो जान बच जाती।
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भर्ती में नहीं होगी परेशानी इसलिए पहले कटा लिया था पर्चा
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16 दिन के बच्चे को बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी आने के बाद तुरंत भर्ती मिल जाएगी, यह सोचकर परिजनों ने बीएचयू पहुंचने से पहले ही इमरजेंसी का पर्चा कटा लिया था। लेकिन उनकी ये कोशिश बेकार साबित हुई।
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बीएचयू का सर सुंदरलाल अस्पताल
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बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राजनीति प्रसाद ने कहा कि अस्पताल की इमरजेंसी के बाल रोग विभाग में तैनात रेजिडेंट सहित अन्य लोगों को पहले ही यहां आने वाले बच्चों को तुरंत भर्ती करने का निर्देश दिया गया है। एनआईसीयू, पीआईसीयू आदि के बारे में भी तुरंत जानकारी देने को कहा गया है। बावजूद इसके किस परिस्थिति में यह लापरवाही की गई, इस पर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों से जवाब मांगा जाएगा।
बीएचयू में डॉक्टर हड़ताल पर मरीज और तीमारदार परेशान।
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बीएचयू अस्पताल के एमएस प्रो. केके गुप्ता ने कहा कि बच्चों के इलाज में इस तरह की लापरवाही की घटना बहुत गंभीर है। इस पर बाल रोग विभाग के अध्यक्ष को पत्र भेजकर इस घटना पर जवाब मांगा जाएगा। बाल रोग विभाग के साथ ही इमरजेंसी में तैनात सभी सीएमओ को इलाज के लिए आने वाले मरीजों के भर्ती व्यवस्था की मानीटरिंग करते रहने को कहा गया है।