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Navratri 2024: शिव की नगरी काशी में नवरात्रि की धूम, काशी विश्वनाथ धाम में विराजीं मां दुर्गा, देखें- तस्वीरें

Thu, 03 Oct 2024 11:54 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
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काशी विश्वनाथ धाम में विराजीं मां दुर्गा - फोटो : मंदिर प्रशासन
नवरात्र के पहले दिन घरों से लेकर शहर के देवी मंदिरों में कलश स्थापित कर मां की आराधना की गई। काशी विश्वनाथ धाम में पहली बार कलश स्थापना करके नवरात्रि का पूजन और उत्सव आयोजित किया गया।
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काशी विश्वनाथ धाम में विराजीं मां दुर्गा - फोटो : मंदिर प्रशासन
गुरुवार को प्रतिपदा में प्रात: पांच शास्त्री मंदिर परिसर में कलश स्थापित करके मां दुर्गा का आह्वान किया गया। शाम को भजन और बनारसी लोकगीत पचरा का आयोजन होगा। 



 
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काशी विश्वनाथ धाम में विराजीं मां दुर्गा - फोटो : मंदिर प्रशासन
पांच शास्त्रियों द्वारा नौ दिन तक अनवरत दुर्गा सप्तशती का नियमित पाठ होगा। इसके साथ ही नौ दिन माता विशालाक्षी को चुनरी, सोलह शृंगार व प्रसाद बाबा विश्वनाथ की ओर से भेजी जाएगी। इसके साथ ही नवरात्रि में हर दिन नौ देवियों के अलग-अलग सिद्ध पीठों में चुनरी, सोलह शृंगार व प्रसाद भेंट किया जाएगा। 

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मां शैलपुत्री - फोटो : अमर उजाला
नवरात्र की प्रतिपदा पर मां शैलपुत्री के दर्शन पूजन का विधान है। आधी रात के बाद मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। मंदिर में भक्तों की भीड़ को देखते हुए बैरिकेडिंग की गई है। वहीं दुर्गाकुंड, मां विशालाक्षी सहित शहर के सभी दुर्गा मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रबंध किए गए हैं।
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मां शैलपुत्री धाम में भक्तों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
12 अक्तूबर को काशी विश्वनाथ धाम में होगी शस्त्र पूजा
चार अक्तूबर को रामलीला में धनुष यज्ञ का मंचन मंदिर चौक पर होगा। पांच अक्तूबर को राम द्वारा रावण वध का मंचन, छह अक्तूबर को बंगाली लोक नृत्य धुनुची का आयोजन होगा। सात अक्तूबर को 51 मातृशक्तियों द्वारा ललिता सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ किया जाएगा। आठ अक्तूबर को महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र पर नृत्य, नौ अक्तूबर को देवी मां का भजन, 10 अक्तूबर को माता के नौ स्वरूपों को दर्शाती नौ कन्याओं द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ होगा। 11 अक्तूबर को प्रातःकाल नीलकंठ मंदिर के समीप यज्ञ कुंड पर हवन औरशाम को भजन व नृत्य का आयोजन होगा। दशमी तिथि पर 12 अक्तूबर को सुबह सांकेतिक रूप से शस्त्र पूजा मंदिर प्रांगण में की जाएगी। शाम को शास्त्रीय युद्ध कला का प्रदर्शन मंदिर चौक पर होगा।
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Navratri 2024 - फोटो : अमर उजाला
तीन घंटे 23 मिनट का है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
तीन अक्तूबर को कलश स्थापना मुहूर्त सुबह 6:07 बजे से सुबह 9:30 बजे तक रहा। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:37 बजे से 12:23 बजे तक रहेगा। हालांकि सुबह से शाम तक घट स्थापना कभी भी किया जा सकता है। शास्त्रानुसार प्रात: घट स्थापना की विशेष महत्ता बताई गई है। नवरात्र के पहले दिन नवापुरा, दारानगर, सुड़िया, गायघाट और टाउनहॉल के पंडाल में प्रतिमाएं स्थापित हो गईं। कलश स्थापना के साथ ही नौ दिवसीय अनुष्ठान भी शुरू हो गया।
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मां का स्वरूप और भोग

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Navratri 2024 - फोटो : अमर उजाला
स्वरूप             भोग
शैलपुत्री घी, अनार
ब्रह्मचारिणी चीनी सेब
चंद्रघंटा दूध, केला
कूष्मांडा मालपुआ, नाशपाती
स्कंदमाता केला, अंगूर
कात्यायनी शहद, अमरूद
कालरात्रि  गुड़, चीनी
महागौरी नारियल, शरीफा
सिद्धिदात्री सफेद तिल, संतरा
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