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Navratri 2023: शत्रु से मुक्ति पाने के लिए करें मां कालरात्रि की आराधना, जानिए पूजा विधि और बीज मंत्र

Fri, 20 Oct 2023 01:58 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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Sharadiya Navratri Maa Kalratri Poojan - फोटो : Amar Ujala Digital
शारदीय नवरात्र की सप्तमी को मां काली की आराधना की जाती है। शुंभ, निशुंभ के साथ रक्तबीज का विनाश करने के लिए देवी ने कालरात्रि का रूप धारण किया था। हाथ में खप्पर, तलवार और गले में नरमुंड की माला धारण करने वाली मां का स्वरूप संकट से उबारने वाला है। महासप्तमी की पूजा 21 अक्तूबर को होगी। वाराणसी स्थित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर के पुजारी पं. राजू गिरी ने बताया कि श्रीमार्कंडेय पुराण और श्रीदुर्गा सप्तशती के अनुसार काली मां की उत्पत्ति जगत जननी मां अंबा के ललाट से हुई थी। दुर्गा के नौ रूपों में सातवां रूप हैं देवी कालरात्रि का। इसलिए नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। शत्रुओं से मुक्ति और कष्ट निवारण के लिए मां काली की आराधना फलदायी है। श्री काशी विश्वनाथ गली में मां काली और भोजूबीर पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर मां दक्षिणेश्वरी काली का मंदिर विराजमान है।
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कालरात्रि देवी - फोटो : self
मां कालरात्रि की पूजा गृहस्थ लोगों को मां की शास्त्रीय विधि से पूजा करना चाहिए। देवी की पूजा में नीले रंग का उपयोग करें। माता के इस रूप को गुड़ का भोग अति प्रिय है। रात रानी या गेंदे के फूल अर्पित कर घी का दीपक लगाएं और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। पूजा में शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।

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मां कालरात्रि का दर्शन पूजन करते लोग - फोटो : अमर उजाला
शत्रुओं से मुक्ति पाने के लिए लिए रात्रि में स्नान कर लाल वस्त्र पहने और 108 बार नवार्ण मंत्र - ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ का जाप करें। मान्यता है इससे शुभ परिणाम मिलेंगे।

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वाराणसी में भोजूबीर पंचक्रोशी मार्ग स्थित मां दक्षिणेश्वर काली जी का श्रृंगार । - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि नवरात्र में श्रीमहाकाली, श्रीमहासरस्वती व श्रीमहालक्ष्मी जी की पूजा का विधान है। आस्थावान अपने पारंपरिक व धार्मिक विधि से पूजा करते हैं। मां काली की पूजा समस्त संकटों के निवारण के लिए होती है। विमल जैन ने बताया कि भगवती मां काली की महिमा अपार है। वह भगवान शिव की प्रिय मानी गई हैं।
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मां काली
मां काली की आराधना से अकालमृत्यु, शत्रुभय, भूत-प्रेत जनित कष्ट से मुक्ति मिलती है। अश्विन सप्तमी तिथि 20 अक्तूबर को रात 11:26 बजे से 21 अक्तूबर को रात 9:54 बजे तक रहेगी। शारदीय नवरात्र में मां काली को भद्रकाली अवतार के रूप में माना गया है। नवदुर्गा के सप्तम रूप श्री महाकाली की पूजा की जाती है।
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मां काली
  • मां कालरात्रि बीज मंत्र - क्लीं ऐं श्रीं कालिकायै नम:
  • मां कालरात्रि का सिद्ध मंत्र - ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:
  • प्रार्थना मंत्र - एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा। वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
  • मां कालरात्रि भोग - साहस की देवी कालरात्रि को गुड़ का भोग अर्पित करें। कहते हैं इससे शत्रु और विरोधियों पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद मिलता है।
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मां काली का भव्य मंदिर।
  • मां कालरात्रि प्रिय रंग - सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा में नीला रंग शुभ माना जाता है। ये निडरता का प्रतीक है।
  • मां कालरात्रि फूल - मां का रंग अंधकार यानी काली रात की तरह है। इन्हें रात में खिलने वाला फूल जैसे रात रानी का पुष्प बहुत पसंद है। मान्यता है पूजा में देवी को रात रानी का फूल अर्पित करने से भय, अकाल मृत्यु का डर खत्म हो जाता है।
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