शारदीय नवरात्र की सप्तमी को मां काली की आराधना की जाती है। शुंभ, निशुंभ के साथ रक्तबीज का विनाश करने के लिए देवी ने कालरात्रि का रूप धारण किया था। हाथ में खप्पर, तलवार और गले में नरमुंड की माला धारण करने वाली मां का स्वरूप संकट से उबारने वाला है। महासप्तमी की पूजा 21 अक्तूबर को होगी। वाराणसी स्थित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर के पुजारी पं. राजू गिरी ने बताया कि श्रीमार्कंडेय पुराण और श्रीदुर्गा सप्तशती के अनुसार काली मां की उत्पत्ति जगत जननी मां अंबा के ललाट से हुई थी। दुर्गा के नौ रूपों में सातवां रूप हैं देवी कालरात्रि का। इसलिए नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। शत्रुओं से मुक्ति और कष्ट निवारण के लिए मां काली की आराधना फलदायी है। श्री काशी विश्वनाथ गली में मां काली और भोजूबीर पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर मां दक्षिणेश्वरी काली का मंदिर विराजमान है।