बदलते दौर के साथ बाहुबली मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह माफिया से माननीय बन गए लेकिन मुन्ना बजरंगी की यह हसरत अधूरी रह गई। सोमवार सुबह बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की गोली मार कर हत्या कर दी गई। मुख्तार और बृजेश दोनों ने सियासी जगत में अपना स्थान बनाया लेकिन कई कोशिशें करने के बाद भी मुन्ना बजरंगी की यह चाहत पूरी नहीं हो पाई। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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घरों में कैद हो गए, खिड़कियां तक नहीं खोली
- फोटो : amar ujala
मुख्तार और ब्रिजेश आज यूपी के अलग-अलग जेलों में बंद हैं। पूर्वांचल में खौफ और गैंगवार का बड़ा नाम रहा रहा मुन्ना बजरंगी का ताक अंडरवर्ल्ड से भी जुड़ा था। 90 की दशक में अपराध की दुनिया में नाम कमाने के बाद मुन्ना बजरंगी ने राजनीति में भी पैर जमाने की कोशिश की थी। इसी कोशिश के कारण मुख्तार और मुन्ना के रिश्ते में दरार पड़ी।
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गुर्गे चाय-सिगरेट का मजा लेते रहे
- फोटो : amar ujala
1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए मुख्तार अंसारी की पनाह में काम करने वाला मुन्ना बजरंगी भी नेता बनना चाहता था। वह लगातार मुख्तार अंसारी के निर्देशन में काम कर रहा था। इस दौर में लोग मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगे थे।
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मुन्ना के गुर्गों ने सुरक्षा घेरा बना रखा
- फोटो : amar ujala
2012 में मुन्ना बजरंगी ने लोकसभा चुनाव में गाजीपुर लोकसभा सीट पर अपना एक डमी उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश की। मुन्ना बजरंगी एक महिला को गाजीपुर से भाजपा का टिकट दिलवाने की कोशिश कर रहा था। मुख्तार अंसारी को यह बात मंजूर नहीं थी। यही वजह थी कि मुख्तार उसके लोगों की मदद भी नहीं कर रहे थे।
सपा और भाजपा से निराश होने के बाद मुन्ना बजरंगी ने कांग्रेस का दामन थामा। वह कांग्रेस के एक कद्दावर नेता की शरण में चला गया। कांग्रेस के वह नेता भी जौनपुर जिले के रहने वाले थे मगर मुंबई में रह कर सियासत करते थे। मुन्ना बजरंगी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में नेता जी को सपोर्ट भी किया था। इतना कुछ करने के बाद भी मुन्ना बजरंगी को राजनीति में जगह नहीं मिली।