उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के बीच हुए सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अनुबंध के अंतर्गत आज शाम वाराणसी में एक खास कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। इसका उद्घाटन राज्यपाल राम नाईक करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस भी मौजूद रहेंगे। आगे की स्लाइड्स में जानिए उस कार्यक्रम के बारे में..
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- फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल राम नाईक गुरुवार को मराठी ‘गीत रामायण’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। इस वर्ष महाराष्ट्र के प्रसिद्ध साहित्यकार वर्गीय जीडी माडगुलकर और गायक स्वर्गीय सुधीर फड़के का जन्म शताब्दी वर्ष है। यही गीत रामायण के रचयिता हैं। 10 एवं 11 जनवरी को वाराणसी के सरोजा पैलेस, संत कबीर मार्ग में आयोजित कार्यक्रम में स्वर्गीय जीडी माडगुलकर के पुत्र आनंद माडगुलकर और स्वर्गीय सुधीर फड़के के पुत्र श्रीधर फड़के भावपूर्ण प्रस्तुति देंगे।
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मराठी ‘गीत रामायण’ का कार्यक्रम 13-14 जनवरी को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के जेपी सभागृह में होगा। इसी तरह से एक आयोजन 16-17 जनवरी को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के नेताजी सुभाष चंद्र बोस हॉल में होगा। 19 जनवरी को राजभवन के गांधी सभागार में एक दिवसीय हिंदी ‘गीत रामायण’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
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मराठी समाज के वरिष्ठ संगठन मंत्री और काशी मराठा समाज के अध्यक्ष संतोष पाटील ने बुधवार को पैलेस में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बताया कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की संस्कृति का गहरा संबंध है। काशी के कई घाट मराठा की देन है। भगवान राम का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था पर वनवास के समय नासिक के पंचवटी में रहते थे। इन चीजों को आगे बढ़ाते हुए यह आयोजन किया जा रहा है।
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राज्यपाल राम नाईक
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राज्यपाल राम नाईक गुरुवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय पहुंचेंगे। शाम तीन बजे वह विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन पुस्तकालय में संग्रहीत पांडुलिपियां देखेंगे। विश्वविद्यालय में बुधवार को इसकी तैयारी चलती रही। सरस्वती भवन का निर्माण राजकीय संस्कृत कॉलेज के साथ 16 नवंबर 1907 को इंग्लैंड के प्रिंस और प्रिंसेज आफ वेल्स के काशी आगमन पर हुआ था।
पहले इसका नाम प्रिंस ऑफ वेल्स पड़ा, लेकिन विश्वविद्यालय स्थापना के बाद इस भवन का नाम बदलकर सरस्वती भवन रखा गया। यहां एक लाख ग्यारह हजार एक सौ बत्तीस पांडुलिपियां संग्रहित हैं। इसमें प्राचीन नागरी, देवनागरी में अधिक पांडुलिपियां हैं। इसके अलावा बांग्ला, उड़िया, मैथिली, गुरुमुखी, शारदा, अरबी-फारसी और बर्मी में भी पांडुलिपियां रखी हैं।