फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तस्वीरें: गौरा का गौना कराकर लौटे महादेव, अड़भंगी बरातियों ने लगाए हर-हर महादेव के जयकारे

Thu, 05 Mar 2020 08:35 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
1 of 5
गौरा का गौना करके लौटे महादेव। - फोटो : अमर उजाला।
महादेव के सिर पर अकबरी पगड़ी, तन पर खादी का कुर्ता और धोती और केसरिया बनारसी जरीदार साड़ी में सजीं गौरा। खप्पर की कालिमा सजाए मनोहारी रूप में बाबा और दुल्हन बनी गौरा को विदा करते काशीवासियों का हर-हर महादेव का जयघोष की गूंज। डमरुओं की ध्वनि, शंख की नाद और हवा में उड़ता रंग-बिरंगा गुलाल। जिधर देखिए बस लाल ही लाल गुलाल। रंगभरी एकादशी पर रजत पालकी में सवार बाबा विश्वनाथ जब गौरा को लेकर चले तो काशी की गलियों में भी आस्था की हिलोरें धूम मचाती रहीं।
विज्ञापन

2 of 5
गुरुवार को टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर बाबा के गौने की हलचल रही। बाबा का पूजन ब्रह्म मुहूर्त में आरंभ हुआ। ब्राह्मणों ने बाबा और मां गौरा की प्रतिमाओं को पंचगव्य और पंचामृत से स्नान कराया। मंत्रोच्चार के साथ स्नान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चल रजत प्रतिमाओं से दुग्धाभिषेक हुआ।
विज्ञापन

3 of 5
सुबह में पांच से आठ बजे तक 11 ब्राह्मणों ने षोडशोपचार पूजन किया। इसके बाद बाबा को फलाहार का भोग लगाकर पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने महाआरती की। राजसी ठाट में शृंगार के बाद श्रद्धालुओं के लिए झांकी दर्शन आरंभ हो गया। शाम 5:25 बजे आरती के बाद बाबा की रजत पालकी विश्वनाथ मंदिर के लिए रवाना हुई तो अद्भुत स्वरूप को हर कोई आंखों में बसाने को आतुर नजर आया।

4 of 5
हर-हर महादेव का उद्घोष करते अड़भंगी बरातियों की टोली भी महादेव के साथ चलती रही। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर अपनी नगरी काशी लाए थे। इससे पहले वसंत पंचमी पर तिलक व महाशिवरात्रि पर विवाह की रस्में निभाई गई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
एकादशी के दिन श्री काशी विश्वनाथ विश्वेश्वर का अबीर-गुलाल से विधिवत पूजन-अभिषेक किया जाता है। शिवालयों में माता पार्वती संग भगवान शिव की गुलाल और पुष्प से होली होती है और होलिकोत्सव आरंभ हो जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें