वहीं, बर्खास्तगी के बाद ओम प्रकाश राजभर भी शायद खुद को 'साइलेंट' रखने के उद्देश्य से मोबाइल फोन भी स्वीच ऑफ कर लिए हैं। हालांकि सुभासपा के प्रदेश महासचिव से संपर्क होने पर उन्होंने बताया कि यदि अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर को मंत्री पद का लालच होता तो इस तरह सरकार में रहकर सरकार की गलत नीतियों का विरोध नहीं करते। जो आज हुआ वो तो होना ही था, लेकिन ऐसे वक्त पर होना भाजपा के द्वेषपूर्ण मानसिकता को परिलक्षित करता है।