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कृष्ण की आत्मकथा लिखने वाले पद्मश्री मनु शर्मा ने काशी में ली अंतिम सांस, साहित्य जगत में शोक

Thu, 09 Nov 2017 02:53 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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मनु शर्मा - फोटो : अमर उजाला
प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री मनु शर्मा का आज सुबह उनके वाराणसी स्थित आवास पर निधन हो गया। उनके निधन की सूचना से काशी के साहित्यकार जगत में शोक की लहर दौड़ गई। मनु शर्मा बहुत गरीब परिवार से थे। उनका शुरुआती जीवन बेहद अभाव में बीता। उन्होंने जिंदगी से जंग जारी रखी और वो मुकाम पाया, जिसको पाने के ‌लोग सपने देखते हैं। आगे की स्लाइड्स में जानिए पूरी खबर...
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मनु शर्मा - फोटो : अमर उजाला
प्रख्यात साहित्यकार, लेखक और चिंतक मनु शर्मा का आज सुबह उनके वाराणसी स्थित आवास पर निधन हो गया। वह करीब 89 वर्ष के थे। कृष्ण की आत्मकथा लिखने वाले पद्मश्री मनु शर्मा के पुत्र हेमंत शर्मा ने बताया कि उनके पिता का आज सुबह साढ़े छह बजे निधन हुआ। मनु शर्मा का अंतिम संस्कार कल सुबह मणिक‌र्णिका घाट पर होगा। 
 
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मनु शर्मा - फोटो : अमर उजाला
इस बात की जानकारी खादी और ग्राम उद्योग, उत्तर प्रदेश के प्रिसिंपल सेक्रेटरी नवनीत सहगल ने भी अब से कुछ देर पहले ट्‌वीट कर दी थी. मनु शर्मा आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखक है. उन्होंने साहित्य की हर विधा में लिखा है. उनका जन्म 1928 ई. में उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में हुआ। ‘आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों, परसों नहीं तो बरसों बाद मैं डायनासोर के जीवाश्म की तरह पढ़ा जाऊंगा.’ 

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मनु शर्मा - फोटो : अमर उजाला
इसी विश्वास के साथ मनु शर्मा की रचना-यात्रा चली. उनकी सर्वाधिक चर्चित रचना ‘कृष्ण की आत्मकथा’ है जो आठ खंडों में प्रकाशित उपन्यास है। उन्होंने ललित निबंधों के साथ कविता लेखन में भी अपनी छाप छोड़ी.  मनु शर्मा बेहद गरीब परिवार से थे और उन्होंने घर चलाने के लिए फेरी लगाकर कपड़ा और मूंगफली तक बेचा. बनारस के डीएवी कॉलेज में वे पुस्‍तकालय में काम किया करते थे और वहीं से उनमें पढ़ने के प्रति रुचि जागी। 
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मनु शर्मा - फोटो : अमर उजाला
वे पुस्तकालय की हर किताब पढ़ गये थे. उन्‍होंने अपनी कलम से पौराणिक उपन्‍यासों को आधुनिक संदर्भ दिया है. 'कृष्ण की आत्मकथा' आठ खंडों में प्रकाशित है जिसमें 3000 पृष्ठ हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था- "इस रचना को पढ़ने में मैं इतना खो गया कि कई जरूरी काम तक भूल गया था। पहली बार कृष्ण कथा को इतना व्यापाक आयाम दिया गया है।" 
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मनु शर्मा - फोटो : अमर उजाला
उनकी प्रमुख पुस्तकों में तीन प्रश्न, राणा सांगा, छत्रपति, एकलिंक का दीवान ऐतिहासिक उपान्यास है. इसके अलावा मरीचिका, विवशता, लक्ष्मण रेखा, गांधी लोटे, सामाजिक उपान्यास तथा द्रौपती की आत्मकथा, द्रोण की आत्मकथा, गंधारी की आत्मकथा और अभिशप्त कथा पौराणिक उपान्यास हैं. इनके अलावा पोस्टर उखड़ गया, मुंशी नवनीत लाल, महात्मा और दीक्षा कहानी संग्रह हैं. खूंटी पर टंगा वसन्त कविता संग्रह है. उस पार का सूरज प्रमुख निबंध है.
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