गंगा महोत्सव में नृत्य करतीं कलाकार।
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इसके बाद हेमंत ने हैं तेरे भगत निराले शिव शंकर डमरू वाले..., रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई... की प्रस्तुति दी। इससे पहले बनारस घराने की तीन पीढि़यों का सितार वादन आकर्षण का केंद्र रहा। पं. शिवनाथ मिश्र, उनके पुत्र पं. देवब्रत मिश्र और पौत्र कृष्णा मिश्र ने एक साथ मंच संभाला। सबसे पहले राग किरवानी की अवतारणा की। इसमें मध्यलय में रूपक ताल एवं द्रुत में तीन ताल की बंदिश प्रस्तुत किया।
दूसरा कार्यक्रम धारवाड़ की सुजाता गुरव के गायन का रहा। उन्होंने राग मधुवंती में निबद्ध बंदिश से शुरुआत की और समापन भजन से किया। गंगा महोत्सव की तीसरी प्रस्तुति में वायलिन पर पं. सुखदेव मिश्र, सितार पर पं. नरेंद्रनाथ मिश्र और तबले पर पं. किशोर मिश्र ने संगत की। चौथा कार्यक्रम सौरव-गौरव मिश्रा के कथक का रहा। इसके बाद आस्था शुक्ला और अमलेश शुक्ला ने मंच संभाला।