धार्मिक नगरी काशी की पहचान पर रोशनी के नए रंग खूबसूरती का नया अहसास बन गए हैं। अब इसे और निखारने के साथ ही इसको मूल रूप में लाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए हृदय, प्रसाद सहित कई योजनाओं के तहत साफ-सफाई, पेंटिंग और म्यूरल आर्ट बनवाए जा रहे हैं। वहीं अब राष्ट्रपति भवन और इंडियागेट की तर्ज पर डायनेमिक लाइट्स भी लगवाई जा रही हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें...
विज्ञापन
2 of 5
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
इससे इन इमारतों और धराहरों की कलाकृति रात में भी दूर से ही निकखरकर सामने आ जाएंगी। मंदिर, स्टेशन, प्राचीन इमारातों सहित गंगा के घाट के अलावा राजघाट का मालवीय ब्रिज और सामने घाट का पुल भी डायनेमिक लाइटों से जगमगाएगा। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्लूडी) करीब 12 करोड़ रुपए खर्च करके यह लाइटें लगवाई जा रही है, जो जून तक पूरा हो जाएगा।
विज्ञापन
3 of 5
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
सीपीडब्लूडी के स्पेशल डीजी प्रभाकर सिंह ने बताया कि करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से बनारस को संवारने का काम किया जाएगा। इसके लिए गाजियाबाद एकेडमी के इलेक्टॉनिक विभाग के इंजीनियरों को यह काम दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिन इंजीनियरों ने राष्ट्रपति भवन की नॉर्थ, साउथ साइट और इंडिया गेट पर डायनेमिक लाइट्स लगाई है, वहीं बनारस के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
4 of 5
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
इसमें बनारस में दरभंगा घाट, दशाश्वमेध घाट, मुंशी घाट, राज घाट और तुलसी घाट पर लाइटिंग का काम किया जा रहा है, जो जून तक पूरा हो जाएगा। वहीं प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का काशी विश्वनाथ मंदिर, दुर्गा मंदिर, टाउनहाल, कैंट स्टेशन, मालवीय ब्रिज और सामने घाट पुल आदि शामिल हैं।
डायनेमिक लाइट्स बहुत किफायती हैं। यह बिजली की बचत के लिहाज से खरीदी जाती हैं। इनसे इमारतों को रोशन करने की लागत कम आती है। इन लाइट्स की हर दिन बदलते मौसम और त्योहारों या कोई खास मौके के हिसाब से थीम बदल दी जाती है। यह लाइट्स थीम बेस्ड लाइटिंग, आधुनिक एलईडी टेक्नोलॉजी और सेल्फ कंट्रोल मैनेजमेंट सिस्टम पर आधारित रहती हैं। लाइट्स को रिमोट से हैंडिल किया जा सकता है।