काशी विश्वनाथ धाम का गेट नंबर चार
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दरअसल, शनिवार को दूसरे दिन सर्वे की कार्रवाई के विरोध में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ताओं ने न्यायालय में अधिवक्ता आयुक्त पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उन्हें बदलने की याचिका दाखिल की थी। न्यायालय ने इस याचिका पर अधिवक्ता आयुक्त व वादी पक्ष से सोमवार को जवाब मांगा था।
मालूम हो कि सिविल जज (सीनियर डिविजन) ने अधिवक्ता आयुक्त से कमीशन की कार्रवाई पूरी कर ज्ञानवापी परिसर के सर्वे और वीडियोग्राफी की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए 10 मई की तिथि तय की थी। छह और सात मई को हंगामे व विरोध के चलते सर्वे की कार्रवाई रुकने और प्रतिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता आयुक्त पर आरोप के बाद न्यायालय में आज सभी पक्षों की मौजूदगी में सुनवाई हुई।
याचिका दाखिल करने वाली महिलाएं
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दरअसल 18 अगस्त 2021 को पांच महिलाएं शृगांर गौरी में नियमित दर्शन पूजन की मांग को लेकर कोर्ट पहुंची थीं। महिला वादियों ने कहा था कि शृंगार गौरी मंदिर में पहले की परंपरा के अनुसार साल में एक बार पूजा होती थी, लेकिन हमारी मांग है कि देवी विग्रहों का नियमित दर्शन-पूजन करने की अनुमति दी जाए। इसमें किसी प्रकार की बाधा न डाली जाए। कोर्ट ने इस अपील पर ज्ञानवापी परिसर में सर्वे और वीडियोग्राफी का आदेश दिया।
काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट पर तैनात पुलिस बल
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ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के लिए कमीशन कायर्वाही के बीच वादी पक्ष की एक महिला के रिश्तेदार की ओर से मुकदमा वापस लेने संबंधी बयान से हलचल मची है। मुस्लिम पक्ष के विरोध के कारण सर्वे की कार्रवाई रुकने के अगले दिन रविवार को वादी पक्ष को सहयोग कर रहे विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन ने याचिका वापस लेने का दावा कर किया।
जितेंद्र सिंह के मुताबिक सोमवार को याचिका वापस ली जाएगी। वादी राखी सिंह का रिश्तेदार होने के कारण जितेंद्र सिंह बिसेन के इस बयान को गंभीरता से लिया जा रहा है। वाद से जुड़ी चार अन्य महिलाएं मंजू व्यास, सीता साहू, लक्ष्मी देवी और रेखा देवी ने ऐसे किसी फैसले से इनकार किया और कहा कि हमारी तरफ से मरते दम तक यह केस लड़ा जाएगा। हालांकि, खुद राखी सिंह की तरफ से इस संबंध में कोई बयान नहीं आया है।