विश्व के इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले गुरु तेगबहादुर का स्थान अद्वितीय है। सिक्खों के नौवें गुरु गुरु तेगबहादुर को हिंदी की चादर के नाम से जाना जाता है। गुरु महाराज का 400वां प्रकाशपर्व राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान काशी भी रौशन होगी और गुरुबानी का पाठ होगा।
गुरुद्वारा गुरुबाग के मुख्य ग्रंथी भाई सुखदेव सिंह ने बताया कि गुरु तेग बहादुर पंजाब से चलकर दिल्ली, आगरा, मथुरा, कानपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर और चुनार होते हुए 1660 ई में काशी पहुंचे। गुरु नानक देव के अनुयायी भाई कल्याण को जब यह जानकारी मिली तो उनके दर्शन के लिए अपने आवास नीचीबाग में तैयारियां की। यहां गुरु तेगबहादुर ने सात माह 16 दिन तक गुरुनानक के उपदेश श्रद्धालुओं को दिए। नीचीबाग गुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी भाई रंजीत सिंह ने बताया कि उनके आगमन के दौरान ही एक घटना घटी। देखें अगली स्लाइ्डस...।