उस्ताद का जर्जर मकान
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जब रिनोवेशन होगा तो तोड़फोड़ तो होगी ही। हम उनके कमरे से कोई छेड़छाड़ नहीं करेंगे। उसको रिनोवेट करके संग्रहालय का ही स्वरूप दिया जाएगा। नजमी ने प्रशासन से यह सवाल किया कि हमारे पास आय का कोई और जरिया नहीं है। अगर हम अपने मकान को कॉमर्शियल स्वरूप दे रहे हैं तो इससे किसी को क्या परेशानी हो सकती है। दादा अब्बा की निशानियां तो हम लोगों ने सुरक्षित रखी हुई हैं।